Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की बच्चियों की विदेशों में तस्करी को लेकर गहरी चिंता जताई है. अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि सुदूर ग्रामीण इलाकों से बच्चियों को सऊदी अरब सहित अन्य देशों में ले जाया जाता है, जहां उनका मानसिक और शारीरिक शोषण होता है. ऐसे मामलों को रोकने के लिए राज्य सरकार को प्रभावी और सख्त कदम उठाने होंगे.
पंचायत स्तर पर सतर्कता की जरूरत
कोर्ट ने कहा कि मानव तस्करी में संलिप्त लोगों के प्रति ग्रामीण क्षेत्रों और पंचायतों में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है. स्थानीय स्तर पर सतर्कता से ही बच्चियों को इस संगठित अपराध का शिकार होने से बचाया जा सकता है. अदालत ने इस दिशा में प्रशासन की सक्रिय भूमिका पर जोर दिया.
गृह सचिव और आईजी से अदालत ने पूछे सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत के आदेश पर गृह सचिव वंदना दादेल और साउथ छोटानागपुर जोन के आईजी ऑनलाइन पेश हुए. न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति एके राय की पीठ ने यह जानना चाहा कि दूसरे राज्यों से बिजनेस के नाम पर झारखंड आने वाले घुमंतू लोगों को लेकर क्या कोई गाइडलाइन तय की गई है.
सरकार की दलील और अगली सुनवाई की तारीख
गृह सचिव ने अदालत को बताया कि मौलिक अधिकारों के तहत किसी व्यक्ति को एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने से रोका नहीं जा सकता. हालांकि राज्य सरकार ऐसे लोगों के लिए दिशा-निर्देश तय कर सकती है. कोर्ट ने गृह सचिव को 25 फरवरी को भी अगली सुनवाई में ऑनलाइन उपस्थित रहने का निर्देश दिया है.
गुमला की लापता बच्ची का मामला
अदालत ने गुमला से लापता बच्ची के मामले में गठित एसआईटी की रिपोर्ट 11 फरवरी को पेश करने को कहा है. यह मामला सितंबर 2018 से लापता छह वर्षीय बच्ची से जुड़ा है, जिसकी बरामदगी को लेकर मां ने हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की थी. इसी मामले में पहले गठित एसआईटी की छापेमारी में वर्ष 2023 में नौ लापता बच्चों को बरामद किया गया था. फिलहाल बच्ची की तलाश जारी है. राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने पक्ष रखा.
हाईकोर्ट की टिप्पणी ने एक बार फिर झारखंड में मानव तस्करी की गंभीर समस्या को सामने ला दिया है. अदालत का जोर प्रशासनिक सतर्कता और जमीनी स्तर पर जागरूकता पर है. यदि पंचायत और स्थानीय समुदाय को साथ लेकर ठोस नीति लागू होती है, तो बच्चियों की तस्करी पर प्रभावी रोक संभव हो सकती है.