Health News: आयुष्मान भारत और ईएसआईसी योजना से जुड़े लाखों लाभार्थियों के लिए केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य व्यवस्था में अहम बदलाव किया है. निजी अस्पतालों में डॉक्टरों की कंसल्टेंसी फीस को लेकर लंबे समय से उठ रही शिकायतों के बीच अब इसकी अधिकतम सीमा तय कर दी गई है. इस फैसले से इलाज को सुलभ और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
नई व्यवस्था में तय हुई अधिकतम कंसल्टेंसी फीस
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की नई गाइडलाइन के अनुसार आयुष्मान भारत और ईएसआईसी से संबद्ध निजी और सूचीबद्ध अस्पतालों में MBBS डॉक्टर अधिकतम 350 रुपये और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर अधिकतम 700 रुपये तक ही कंसल्टेंसी फीस ले सकेंगे. तय सीमा से अधिक राशि वसूलने की अनुमति नहीं होगी.
शिकायतों के बाद लिया गया फैसला
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब देशभर से इलाज के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने की लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं. स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इसका उद्देश्य मरीजों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से बचाना और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ बिना किसी दबाव के जरूरतमंदों तक पहुंचाना है.
नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि तय सीमा से अधिक कंसल्टेंसी फीस वसूलने वाले अस्पताल या चिकित्सक के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे. इसमें योजना के पैनल से अस्पताल को हटाना, आर्थिक दंड और अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई शामिल होगी.
मजदूर और मध्यम वर्ग को मिलेगा सीधा लाभ
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार इस फैसले से इलाज के नाम पर होने वाली अनियंत्रित वसूली पर रोक लगेगी. इसका सबसे अधिक लाभ मजदूर, निम्न और मध्यम आय वर्ग के उन परिवारों को मिलेगा जो आयुष्मान भारत और ईएसआईसी योजनाओं पर निर्भर हैं.
स्वास्थ्य व्यवस्था में भरोसा बढ़ेगा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कंसल्टेंसी फीस की सीमा तय होने से मरीजों और निजी अस्पतालों के बीच भरोसा मजबूत होगा. साथ ही अस्पतालों की जवाबदेही भी तय होगी, जो अब तक शुल्क निर्धारण में काफी हद तक स्वतंत्र थे.
CGHS में पहले ही हो चुका है संशोधन
गौरतलब है कि इससे पहले सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम के तहत भी ओपीडी कंसल्टेंसी फीस को डॉक्टर की योग्यता और विशेषज्ञता से जोड़ते हुए संशोधित किया गया था. स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ किया है कि 700 रुपये की अधिकतम सीमा केवल डीएम और एमसीएच सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों पर लागू होगी.
ESIC योजना की पृष्ठभूमि
ईएसआईसी योजना 1948 के अधिनियम के तहत संचालित देश की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल है. यह 21 हजार रुपये या उससे कम मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को बीमारी, मातृत्व, विकलांगता और दुर्घटना की स्थिति में इलाज और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराती है.
कंसल्टेंसी फीस की अधिकतम सीमा तय होना स्वास्थ्य व्यवस्था में संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इससे मरीजों पर आर्थिक दबाव कम होगा और सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी. साथ ही निजी अस्पतालों को भी तय मानकों के भीतर काम करना होगा, जिससे इलाज की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और मरीज केंद्रित बन सकेगी.