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  • 2026-01-27

JBVNL: बिजली वितरण क्षेत्र की रिपोर्ट, निजी कंपनियों ने कमाया मुनाफा, सरकारी डिस्कोम्स अभी भी घाटे के जाल में

Jharkhand: केंद्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी 14वीं वार्षिक एकीकृत रेटिंग और रैंकिंग रिपोर्ट ने देश की बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय सेहत का कच्चा चिट्ठा खोल दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में बिजली वितरण क्षेत्र ने कुल 2,701 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। हालांकि, आंकड़ों की गहराई में जाने पर पता चलता है कि यह लाभ मुख्य रूप से निजी कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन के कारण है।

निजी कंपनियों का शानदार प्रदर्शन

देश की 12 निजी वितरण कंपनियों ने अपनी परिचालन दक्षता और प्रबंधन के दम पर कुल 12,138 करोड़ रुपये का मोटा मुनाफा कमाया है। रिपोर्ट बताती है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी ने समग्र बिजली घाटे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सरकारी कंपनियों की मिली-जुली तस्वीर

मुनाफा कमाने वाली कंपनियां, 42 में से 22 सरकारी कंपनियों ने 19,586 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया। इसमें पंजाब की PSPCL 6,216 करोड़ सबसे आगे रही। घाटे का बोझ, वहीं, 20 सरकारी कंपनियां भारी नुकसान में रहीं, जिन्होंने कुल 29,712 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया।

घाटे में अग्रणी कंपनियां

रिपोर्ट के मुताबिक, घाटा दर्ज करने वाली प्रमुख कंपनियों में कर्नाटक की बेसकॉम 5,476 करोड़ रुपये और उत्तर प्रदेश की पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम 4,728 करोड़ रुपये शीर्ष पर हैं। झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम JBVNL ने भी 1,928 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया है, जो राज्य की वितरण व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करता है।

यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि जहां निजी कंपनियां और कुछ चुनिंदा सरकारी डिस्कोम्स मुनाफे की राह पर हैं, वहीं एक बड़ा हिस्सा अभी भी अक्षमता और वित्तीय घाटे से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि घाटे वाली कंपनियों को सुधार के लिए निजी क्षेत्र की कार्यप्रणाली और तकनीकी उन्नयन को अपनाना होगा।

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