Jharkhand: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन करीब दस दिनों के विदेश दौरे के बाद मंगलवार को राजधानी रांची वापस लौट आए। यह दौरा राज्य के लिए निवेश, उद्योग और भविष्य की विकास योजनाओं के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री 17 जनवरी को स्विट्ज़रलैंड के दावोस के लिए रवाना हुए थे, जहां उन्होंने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की बैठक में भाग लिया। इसके बाद वे यूनाइटेड किंगडम के आधिकारिक दौरे पर गए।
18 से 23 जनवरी तक दावोस में रहे
दौरे के पहले चरण में मुख्यमंत्री 18 से 23 जनवरी तक दावोस में रहे और WEF की 56वीं वार्षिक बैठक में शामिल हुए। इस वैश्विक मंच पर उन्होंने झारखंड को एक उभरते हुए औद्योगिक राज्य के रूप में प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने दुनिया भर से आए उद्योगपतियों, निवेशकों और नीति विशेषज्ञों से मुलाकात कर राज्य में मौजूद निवेश संभावनाओं, औद्योगिक नीतियों और संसाधनों पर विस्तार से चर्चा की।
राज्य सरकार के अनुसार, इन बैठकों के दौरान झारखंड में लगभग 11 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों की संभावना बनी है, जिसे राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री 23 से 26 जनवरी तक इंग्लैंड में रहे
इसके बाद दौरे के दूसरे चरण में मुख्यमंत्री 23 से 26 जनवरी तक इंग्लैंड में रहे। इस दौरान उन्होंने लंदन और ऑक्सफोर्ड में निवेश, उद्योग, शिक्षा और अनुसंधान से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और बैठकों में हिस्सा लिया। लंदन में उन्होंने इंपीरियल कॉलेज के अनुसंधान केंद्रों का दौरा किया, जहां क्रिटिकल मिनरल्स, वैल्यू एडेड इंडस्ट्री और आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से चर्चा हुई। इन चर्चाओं का मकसद झारखंड में उच्च तकनीक आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना रहा।
मुख्यमंत्री ने सेंट जॉन्स कॉलेज का किया भ्रमण
ऑक्सफोर्ड प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने सेंट जॉन्स कॉलेज का भी भ्रमण किया। यहां उन्होंने झारखंड के महान आदिवासी नेता और मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों और अभिलेखों का अवलोकन किया। इस अवसर पर कॉलेज प्रशासन की ओर से मुख्यमंत्री का औपचारिक स्वागत किया गया, जो राज्य के लिए गर्व का क्षण रहा।
विशेष टास्क फोर्स के गठन की हो रही तैयारी
राज्य सरकार का मानना है कि यह विदेश दौरा झारखंड की पहचान को केवल खनन आधारित राज्य तक सीमित रखने के बजाय उसे औद्योगिक, आईटी और हरित तकनीक के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा। निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने और उन्हें समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए सरकार विशेष टास्क फोर्स के गठन की भी तैयारी कर रही है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो भी समझौते हुए वह सिर्फ कागज़ों तक सीमित न रहें, बल्कि राज्य में नए उद्योग लगें और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हों।