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  • 2026-01-27

Jharkhand News: मनरेगा बचाओ आंदोलन को लेकर रांची में राज्य स्तरीय जुटान, 2 फरवरी को उमड़ेंगे मजदूर

Jharkhand News: मनरेगा से जुड़े नए कानून के विरोध और योजना को पूरी मजबूती से लागू करने की मांग को लेकर झारखंड में हलचल तेज हो गई है. इसी कड़ी में 2 फरवरी को रांची में राज्यभर के मनरेगा मजदूर एक मंच पर जुटेंगे. यह राज्य स्तरीय सभा ग्रामीण मजदूरों के अधिकार और रोजगार की सुरक्षा को लेकर अहम मानी जा रही है.

रांची में सुबह 11 बजे से होगी सभा
झारखंड नरेगा वॉच के आह्वान पर यह कार्यक्रम बापू वाटिका मोरहाबादी रांची में आयोजित किया जाएगा. सभा की शुरुआत सुबह 11 बजे होगी. आयोजन में ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की मौजूदगी भी प्रस्तावित है. आयोजकों का कहना है कि यह जुटान मजदूरों की आवाज को मजबूती देने का मंच बनेगा.

मनरेगा को बताया गया मजदूरों की रीढ़
मजदूर संगठनों ने कहा है कि करीब 20 वर्ष पहले लागू हुए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून ने गांवों की तस्वीर बदली है. इस योजना से मजदूरों को रोजगार मिला, पलायन पर रोक लगी और दलित आदिवासी व भूमिहीन परिवारों को सम्मान के साथ काम करने का अवसर मिला. हर हाथ को काम और काम का पूरा दाम का नारा इसी सोच को दर्शाता है.

नए कानून पर जताई गई कड़ी आपत्ति
आयोजकों का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा पारित VB-ग्रामजी 2025 कानून से मनरेगा कमजोर हो गया है. उनका कहना है कि नई व्यवस्था में रोजगार, बजट, मजदूरी और काम की अवधि से जुड़े फैसले पूरी तरह केंद्र सरकार के नियंत्रण में चले जाएंगे, जिससे काम के अधिकार पर सीधा असर पड़ेगा.

गरीब और आदिवासी परिवारों पर असर की आशंका
मजदूर संगठनों का दावा है कि इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर गरीब दलित और आदिवासी परिवारों पर पड़ेगा. गांवों में काम की कमी से पलायन बढ़ेगा, बच्चों की पढ़ाई छूटेगी और बाल मजदूरी जैसी समस्याएं फिर उभर सकती हैं. इसी चिंता के चलते गांव स्तर पर ग्राम सभाएं कर प्रस्ताव पारित किए जा रहे हैं.

सभा से उठेगी मनरेगा को मजबूत करने की मांग
राज्य स्तरीय सभा के जरिए मांग की जाएगी कि मनरेगा को कमजोर करने के बजाय और मजबूत किया जाए. आयोजकों का कहना है कि यह योजना केवल रोजगार नहीं बल्कि ग्रामीण विकास और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी है. मजदूरों का काम का अधिकार सुरक्षित रखना सरकार की जिम्मेदारी है.

मनरेगा बचाओ आंदोलन झारखंड के ग्रामीण इलाकों में गहराते असंतोष का संकेत है. मजदूर इसे केवल योजना नहीं बल्कि जीवन रेखा मानते हैं. रांची की यह सभा तय करेगी कि आने वाले दिनों में मनरेगा को लेकर संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ेगा और सरकार पर इसका कितना दबाव बन पाता है.
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