Jamshedpur: जमशेदपुर की कला और संगीत की दुनिया से एक अत्यंत दुःखद खबर सामने आई है। शहर के सुप्रसिद्ध कलाकार, सधे हुए तबला वादक और अपनी सुरीली आवाज से भक्ति रस घोलने वाले प्रख्यात भजन गायक रमेश दास अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके असामयिक निधन की खबर फैलते ही संगीत प्रेमियों और सांस्कृतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।
संगीत और भक्ति का अनूठा संगम
रमेश दास केवल एक कलाकार नहीं, बल्कि जमशेदपुर की सांस्कृतिक पहचान का एक अहम हिस्सा थे। शास्त्रीय संगीत की बारीकियों पर उनकी पकड़ जितनी मजबूत थी, तबले की थाप पर उनका नियंत्रण उतना ही जादुई था। उन्होंने न केवल वादन में महारत हासिल की, बल्कि अपने भावपूर्ण भजन गायन से अनगिनत श्रोताओं को भक्ति के सागर में डुबोया। उनके संगीत में तकनीकी शुद्धता के साथ-साथ एक रूहानी गहराई भी महसूस होती थी।
सांस्कृतिक जगत की अपूरणीय क्षति
शहर में होने वाली भजन संध्याएँ हों, शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम हों या सामाजिक महोत्सव, रमेश दास की उपस्थिति कार्यक्रम की सफलता की गारंटी मानी जाती थी। उन्होंने अपनी कला को सिर्फ मंच तक सीमित नहीं रखा, बल्कि गुरु की भूमिका निभाते हुए अनेक युवाओं को संगीत की दीक्षा दी। आज उनके द्वारा तराशे गए शिष्य देश-दुनिया में उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
कलाकारों और संगीत प्रेमियों ने दी श्रद्धांजलि
उनके निधन पर शहर के विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों, वरिष्ठ कलाकारों और संगीत प्रेमियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। स्थानीय कलाकारों का कहना है कि रमेश जी का जाना एक जीवंत संस्थान के खो जाने जैसा है। उनकी सौम्यता और कला के प्रति समर्पण को हमेशा याद रखा जाएगा।
संगीत जगत के जानकारों का मानना है कि रमेश दास ने जमशेदपुर को सांस्कृतिक मानचित्र पर एक विशेष स्थान दिलाया। उनका निधन संगीत के एक गौरवशाली अध्याय का अंत है, जिसकी रिक्तता को कभी भरा नहीं जा सकेगा।