सटीक रेकी और फिल्मी अंदाज में अपहरण
जांच में खुलासा हुआ है कि अपराधी पिछले 10 दिनों से जमशेदपुर में डेरा डाले हुए थे और कैरव गांधी की पल-पल की रेकी कर रहे थे। 13 जनवरी को कदमा-सोनारी लिंक रोड पर अपहरणकर्ताओं ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर कैरव को रोका और चकमा देकर अपनी गाड़ी में बैठा लिया। इसके बाद उसे गया, नालंदा और पलामू जैसे इलाकों में छिपाकर रखा गया।
गिरफ्तारी और बरामदगी
पुलिस ने इस अंतरराज्यीय गिरोह के पास से निम्नलिखित सामान बरामद किया है, 5 पिस्तौल और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस।अपहरण में इस्तेमाल की गई 2 स्कॉर्पियो गाड़ियां। गिरफ्तार अपराधियों में गया के उपेंद्र सिंह और अर्जुन सिंह, नालंदा का अतुल सिंह, जमशेदपुर के 2 स्थानीय अपराधी और बरही के 3 अपराधी शामिल हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन लोगों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है।
एक फोन कॉल ने बिगाड़ा किडनैपर्स का खेल
अपहरणकर्ताओं ने फिरौती के लिए कैरव के पिता और चाचा को फोन किया था। जमशेदपुर पुलिस ने इसी कॉल को तकनीकी रूप से ट्रेस किया, जिससे उनकी लोकेशन पलामू और गया के बीच मिलने लगी। पुलिस ने आधुनिक सर्विलांस की मदद से कड़ियां जोड़ीं और 27 जनवरी को कैरव की सुरक्षित बरामदगी के बाद अब इन अपराधियों को दबोच लिया।
सरगना की तलाश में बिहार में दबिश
हालांकि 8 लोग पकड़े जा चुके हैं, लेकिन इस गिरोह का मुख्य सरगना अब भी फरार है। पुलिस की विशेष टीमें गया और औरंगाबाद में छापेमारी कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि बहुत जल्द मास्टरमाइंड को भी सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।
जमशेदपुर पुलिस का कड़ा संदेश
अपहरण जैसे गंभीर अपराधों पर पुलिस की यह कार्रवाई अपराधियों के मनोबल को तोड़ने वाली है। बिहार और झारखंड पुलिस के आपसी तालमेल से इस संगठित गिरोह का अंत संभव हो सका।