मामला जमशेदपुर के पूर्वी सिंहभूम क्षेत्र के एक दुकान को लेकर है, जहाँ श्रीमती अनिता मंडल और उनकी बहन श्रीमती संजीता सेन को जान से मारने की धमकी देकर उन्हें उनकी दुकान से बेदखल करने का प्रयास किया गया। वर्षों से उक्त दुकान चला रही इन महिलाओं को नए मालिक द्वारा धमकाया गया और उनके जीवन को खतरे में डाल दिया गया।
इस अन्याय के खिलाफ जब महिलाओं की आवाज दबने लगी, तो विनय चंद्र ने NHRCCB के माध्यम से झारखंड पुलिस के पी॰जी॰ पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई (रजिस्ट्रेशन नंबर: GOVJHI/E/2025/0005046, दिनांक 12-09-2025)। उनकी शिकायत के आधार पर पूर्वी सिंहभूम पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए मामले की विस्तृत जाँच शुरू की। जाँच में पाया गया कि महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए पहले से ही उपायुक्त कार्यालय में एक अपील लंबित थी, जिसमें दुकान पर उनके कब्जे को मान्यता दी गई थी।
सजग हुआ और मामले को गंभीरता से लिया
विनय चंद्र न केवल एक शिकायत दर्ज कराने तक सीमित रहे, बल्कि उन्होंने पीड़ित महिलाओं से सीधा संपर्क कर उनकी समस्याओं को गहराई से समझा और उन्हें कानूनी सहायता दिलाने का भरसक प्रयास किया। उनकी इस पहल से पुलिस प्रशासन भी सजग हुआ और मामले को गंभीरता से लिया गया।
आवाज़ उठाई और न्याय की उम्मीद
इस पूरे प्रकरण में विनय चंद्र की भूमिका एक "हीरो" की रही है, जिन्होंने समाज के गुमनाम और शोषित वर्ग के लिए अपनी आवाज़ उठाई और न्याय की उम्मीद जगाई। उनका यह कदम न केवल सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि एक जागरूक नागरिक और संगठन के सहयोग से किसी भी अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा सकती है।
झारखंड पुलिस ने भी इस मामले में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई करके अपनी जवाबदेही साबित की है। पुलिस उपाधीक्षक (विधि-व्यवस्था) द्वारा जाँच रिपोर्ट तैयार कर वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई है, जो प्रशासन की संवेदनशीलता को दर्शाता है। विनय चंद्र ने इस मौके पर कहा, मेरा उद्देश्य केवल न्याय दिलाना है। हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह शोषित और दबे हुए लोगों की मदद करे। मैं झारखंड पुलिस के सहयोग के लिए आभारी हूँ।
समाज के लिए एक मिसाल
यह मामला समाज के लिए एक मिसाल है कि साहस और न्याय के प्रति आस्था रखकर किसी भी बड़े से बड़े अन्याय का सामना किया जा सकता है। विनय चंद्र जैसे लोग समाज में आशा और विश्वास की नई मशाल जलाते हैं।