प्रमुख विवाद, गृह सचिव का नाम शामिल होने पर आपत्ति
इस विवाद का मुख्य केंद्र राज्य के गृह सचिव जे.पी. मीना का नाम पर्यवेक्षक सूची में होना है। आमतौर पर चुनाव आयोग किसी राज्य के मुख्य सचिव या गृह सचिव जैसे शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारियों को दूसरे राज्यों में पर्यवेक्षक के रूप में तैनात नहीं करता, क्योंकि चुनाव के दौरान राज्य की कानून-व्यवस्था बनाए रखने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। राज्य सरकार ने दलील दी है कि ये अधिकारी फिलहाल महत्वपूर्ण सरकारी कर्तव्यों" में व्यस्त हैं, इसलिए उन्हें चुनाव ड्यूटी से मुक्त किया जाना चाहिए।
इन अधिकारियों के नामों पर फंसा पेंच
राज्य सरकार ने जिन 9 अधिकारियों को बदलने का प्रस्ताव दिया है, उनमें गृह सचिव के अलावा कई वरिष्ठ नाम शामिल हैं। आयोग ने इन अधिकारियों को अन्य चुनावी राज्यों (जैसे असम, तमिलनाडु और केरल) में तैनात करने की योजना बनाई थी।
सरकार का तर्क
प्रशासनिक कार्यों और राज्य में चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर इन वरिष्ठ अधिकारियों का मुख्यालय में रहना आवश्यक है। आयोग का पक्ष, सूत्रों के अनुसार, आयोग ने पहले भी अधिकारियों की सूची मांगी थी, लेकिन देरी होने के कारण आयोग ने रैंडम आधार पर नाम तय किए।
टकराव की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब और गहरा गया जब हाल ही में चुनाव आयोग ने राज्य सरकार द्वारा किए गए तीन आईएएस अधिकारियों के तबादलों को रद्द करने का आदेश दिया था। आयोग का कहना था कि वोटर लिस्ट संशोधन SIR प्रक्रिया में लगे अधिकारियों का तबादला बिना आयोग की अनुमति के नहीं किया जा सकता। पश्चिम बंगाल में 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए प्रशासनिक नियुक्तियों और तबादलों पर राजनीतिक सरगर्मी तेज बनी हुई है।