Jharkhand News: राज्य सरकार की आमदनी चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में लक्ष्य से काफी पीछे चल रही है. सरकार ने पूरे साल के लिए 1,43,479.14 करोड़ रुपये राजस्व का अनुमान लगाया था, लेकिन दिसंबर 2025 तक सभी स्रोतों से सिर्फ 70,167.67 करोड़ रुपये ही मिल सके हैं. यह कुल लक्ष्य का मात्र 48.90% है.
पिछले वित्तीय वर्ष में इसी अवधि में सरकार को अपने वार्षिक लक्ष्य का 55.47% राजस्व मिला था. इस तरह इस साल राजस्व संग्रह में करीब 5.57% की गिरावट दर्ज की गई है.
जीएसटी से सबसे ज्यादा कमाई, लेकिन बड़ी गिरावट
राज्य सरकार के अपने राजस्व स्रोतों में जीएसटी सबसे बड़ा स्रोत है, लेकिन इसमें भारी कमी देखी गई है.
• जीएसटी का वार्षिक लक्ष्य: 22,324.69 करोड़ रुपये
• दिसंबर तक प्राप्त राशि: 10,291.72 करोड़ रुपये
• उपलब्धि: 46.10%
पिछले वर्ष इसी अवधि में जीएसटी लक्ष्य का 67.54% प्राप्त हुआ था. यानी इस साल जीएसटी राजस्व में करीब 21.05% की गिरावट आई है. विशेषज्ञों के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा कर संरचना में किए गए बदलाव इसका बड़ा कारण है.
अन्य राजस्व स्रोतों की स्थिति
सरकार को अलग-अलग स्रोतों से मिले राजस्व का विवरण इस प्रकार है:
स्टांप व निबंधन
• लक्ष्य: 1,498.17 करोड़
• प्राप्त: 1,170.37 करोड़
• उपलब्धि: 78.12%
भू-राजस्व
• लक्ष्य: 1,798.75 करोड़
• प्राप्त: 939.91 करोड़
• उपलब्धि: 52.25%
वैट
• लक्ष्य: 9,305.00 करोड़
• प्राप्त: 4,920.80 करोड़
• उपलब्धि: 52.88%
उत्पाद शुल्क
• लक्ष्य: 2,999.82 करोड़
• प्राप्त: 2,457.05 करोड़
• उपलब्धि: 81.91%
केंद्रीय करों में हिस्सेदारी
• लक्ष्य: 47,041.38 करोड़
• प्राप्त: 31,629.01 करोड़
• उपलब्धि: 67.24%
केंद्रीय अनुदान
• लक्ष्य: 17,064.91 करोड़
• प्राप्त: 3,546.75 करोड़
• उपलब्धि: सिर्फ 20.78%
अन्य कर और शुल्क से उम्मीद से ज्यादा रकम
सरकार को “अन्य कर और शुल्क” मद में अनुमान से ज्यादा राशि मिली है.
• अनुमान: 4,093.84 करोड़ रुपये
• दिसंबर तक प्राप्त: 7,092.93 करोड़ रुपये
यह सरकार के लिए राहत की बात रही.
कमाई का 91% जरूरी खर्चों में खर्च
दिसंबर तक सरकार को जो राजस्व मिला, उसका करीब 91% जरूरी खर्चों में चला गया.
मुख्य खर्च इस प्रकार हैं:
• वेतन: 14,284.46 करोड़ रुपये
• पेंशन: 7,624.39 करोड़ रुपये
• कर्ज पर ब्याज: 3,912.17 करोड़ रुपये
कल्याणकारी योजनाओं पर अनुदान: 4,145.21 करोड़ रुपये
इसके अलावा सरकार ने विकास कार्यों के लिए पूंजीगत खर्च (कैपिटल एक्सपेंडिचर) के रूप में 8,731.77 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.
चिंता बढ़ाने वाला संकेत
आंकड़े बताते हैं कि राज्य सरकार की आय अपेक्षा से कम रही है, जबकि खर्च लगातार बढ़ रहा है. खासकर जीएसटी और केंद्रीय अनुदान में कमी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है.
अगर यही स्थिति रही तो आने वाले महीनों में विकास योजनाओं और वित्तीय संतुलन पर असर पड़ सकता है.