Dhanbad News: धनबाद सदर अस्पताल और बार एसोसिएशन भवन के बीच स्वास्थ्य विभाग द्वारा रातों-रात पक्की दीवार खड़ी किए जाने से धनबाद सिविल कोर्ट परिसर में बड़ा विवाद खड़ा हो गया. दीवार के कारण वाहन पार्किंग पूरी तरह बंद हो गई जिससे आक्रोशित अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्यों से खुद को अलग कर लिया.
कोर्ट परिसर में पूरी तरह रुका काम
पेन डाउन के चलते पूरे दिन किसी भी मामले की सुनवाई नहीं हो सकी. जमानत अर्जियों पर आदेश नहीं हो पाए. दर्जनों मामलों में गवाहों की गवाही टल गई. नोटरी पब्लिक से जुड़े कार्य भी पूरी तरह ठप रहे. विधि लिपिक और टाइपिस्ट एसोसिएशन ने भी सभी न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों से दूरी बना ली.
बार पदाधिकारियों के नेतृत्व में धरना
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राधेश्याम गोस्वामी और महासचिव जितेंद्र कुमार के नेतृत्व में अधिवक्ता मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए. गुरुवार के बाद शुक्रवार को भी आंदोलन जारी रहा. अधिवक्ताओं ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक दीवार नहीं हटेगी तब तक पेन डाउन वापस नहीं लिया जाएगा.
प्रशासन से बातचीत और आश्वासन
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए धनबाद एसडीओ डीएसपी सीसीआर और मजिस्ट्रेट आर एन ठाकुर धरनास्थल पर पहुंचे. उन्होंने बताया कि उपायुक्त के निर्देश पर वे बातचीत के लिए आए हैं. अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि शुक्रवार सुबह दीवार हटाकर वहां गेट लगाने का कार्य शुरू किया जाएगा और उपायुक्त के लौटने के बाद स्थायी पार्किंग समाधान भी किया जाएगा.
शर्त के साथ हड़ताल वापसी की घोषणा
प्रशासन के आश्वासन के बाद बार पदाधिकारियों ने कहा कि यदि शुक्रवार सुबह गेट लगाने का कार्य शुरू हो जाता है तो अधिवक्ता हड़ताल वापस ले लेंगे और न्यायिक कार्यों पर लौट आएंगे. साथ ही यह भी भरोसा दिलाया गया कि कंट्रोल रूम जाने वाली सड़क पर जाम नहीं होने दिया जाएगा.
अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी
बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि कोई अधिवक्ता संगठन के फैसले के खिलाफ काम करता है तो उसके विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. गुरुवार सुबह से ही अधिवक्ता मुख्य द्वार पर धरना देते रहे और नारेबाजी करते रहे.
वरिष्ठ अधिवक्ता भी उतरे समर्थन में
धरनास्थल पर पूर्व अध्यक्ष और सरकारी अधिवक्ता अमरेंद्र सहाय भी पहुंचे और प्रशासनिक रवैये को अधिवक्ता विरोधी बताया. वरिष्ठ अधिवक्ता समर श्रीवास्तव, देवी नारायण सिन्हा, शाहनवाज अब्दुल मलिक, दीपक रुइया समेत कई अधिवक्ताओं ने कहा कि वकीलों की परेशानी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.
जनरल बॉडी से निकला था आंदोलन का फैसला
बार पदाधिकारियों ने बताया कि बुधवार को हुई जनरल बॉडी मीटिंग में न्यायिक कार्यों से अलग रहने और प्रशासन के खिलाफ आंदोलन का निर्णय लिया गया था. इसके बाद अधिवक्ताओं ने सिविल कोर्ट से रणधीर वर्मा चौक तक मार्च भी किया था.
यह मामला केवल दीवार या पार्किंग तक सीमित नहीं है बल्कि यह प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था के बीच संवाद की कमी को भी दर्शाता है. समय रहते समाधान नहीं हुआ तो इससे आम लोगों को भी न्याय मिलने में देरी होगी और कोर्ट व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ सकता है.