Jharkhand Politics: झारखंड में DMFT फंड को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के लिए निर्धारित राशि का इस्तेमाल डाक बंगला जैसे निर्माण कार्यों में किया जा रहा है. उन्होंने इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.
रांची और बोकारो में निर्माण पर उठे सवाल
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि रांची जिले में DMFT फंड से 85.86 लाख रुपये की लागत से डाक बंगला बनाया गया है. उन्होंने यह भी दावा किया कि बोकारो जिले में करीब 2.25 करोड़ रुपये की लागत से डाक बंगला और जिम का निर्माण कराया गया है. उनके अनुसार यह फंड खनन और प्रदूषण से प्रभावित इलाकों के लिए है, न कि प्रशासनिक सुविधाओं के विस्तार के लिए.
DMFT फंड का उद्देश्य और नियम
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि DMFT फंड का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण कम करना, स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाना, पानी और हवा की गुणवत्ता सुधारना और प्रभावित लोगों की आजीविका को मजबूत करना है. नियमों में उपायुक्त आवास के रिनोवेशन या डाक बंगला जैसे निर्माण के लिए इस फंड के उपयोग का कोई प्रावधान नहीं है.
उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य में करीब दो हजार पंचायतें प्रदूषण से प्रभावित हैं. ऐसे में उनके लिए निर्धारित राशि को किस आधार पर प्रशासनिक भवनों पर खर्च किया जा रहा है. मरांडी का कहना है कि इससे मूल उद्देश्य से भटकाव साफ दिखाई देता है.
मुख्यमंत्री से SIT गठित करने की मांग
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूरे मामले की जांच के लिए SIT गठित करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि उच्चस्तरीय जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि फंड का उपयोग नियमों के अनुरूप हुआ है या नहीं.
DMFT फंड को लेकर उठे ये आरोप राज्य की वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. यदि जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है तो यह न केवल प्रशासनिक जवाबदेही तय करेगा बल्कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के अधिकारों को लेकर भी बड़ा मुद्दा बनेगा.