समय की पाबंदी और छात्रों की बेबसी
नियमों के मुताबिक, परीक्षा शुरू होने से 10 मिनट पहले ही मुख्य द्वार को बंद कर दिया गया था। प्रशासन की ओर से सख्त निर्देश थे कि देर से आने वाले किसी भी छात्र को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। लेकिन सहरसा के इस केंद्र पर दर्जनों परीक्षार्थी देरी से पहुंचे। जब सुरक्षाकर्मियों ने गेट खोलने से मना कर दिया, तो छात्रों के भविष्य का डर उनकी जान के जोखिम पर भारी पड़ गया।
जान जोखिम में डालकर दीवार पर चढ़े छात्र
इंटरनेट पर वायरल हो रही तस्वीरों और मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, गेट बंद होने के बाद परीक्षार्थी कॉलेज की ऊंची बाउंड्री वॉल पर चढ़ते नजर आए। ताज्जुब की बात यह है कि इस दौरान पुलिस बल और सुरक्षाकर्मी तैनात थे, फिर भी छात्र दीवार फांदकर अंदर घुसते रहे। कइयों के हाथ-पैर में चोटें भी आईं, लेकिन परीक्षा छूटने के डर से वे रुकने को तैयार नहीं थे।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
यह घटना न केवल परीक्षार्थियों की लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि केंद्र की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है, अगर सुरक्षा सख्त थी, तो छात्र दीवार फांदने में सफल कैसे हुए, क्या दीवार फांदकर अंदर जाने वाले छात्रों की तलाशी ली गई, देरी से पहुंचने वाले छात्रों के लिए क्या कोई वैकल्पिक व्यवस्था या काउंसलिंग की सुविधा थी।
अभिभावकों का कहना है कि ट्रैफिक जाम और दूर-दराज के इलाकों से आने के कारण छात्र अक्सर लेट हो जाते हैं, लेकिन दीवार फांदकर प्रवेश करना किसी भी लिहाज से सुरक्षित नहीं है।