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  • 2026-02-04

Jharkhand News: उत्पाद विभाग का राजस्व लक्ष्य बढ़ेगा, लाइसेंस फीस जमा करने की समयसीमा तय

Jharkhand News: राज्य सरकार के राजस्व ढांचे में एक और बड़ा बदलाव होने जा रहा है. झारखंड उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए अपनी आय बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है. इसी क्रम में विभाग ने जिलों को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए समयबद्ध प्रक्रिया तय कर दी है.

10 प्रतिशत बढ़ेगा विभाग का लक्ष्य
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उत्पाद विभाग अपने मौजूदा राजस्व लक्ष्य में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी करेगा. वर्तमान लक्ष्य 3885.11 करोड़ रुपये तय है जिसमें अब वृद्धि की जाएगी. इसे लेकर आयुक्त उत्पाद ने सभी जिलों के सहायक आयुक्त उत्पाद और अधीक्षक उत्पाद को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है.

7 फरवरी तक जमा करनी होगी राशि
राजस्व लक्ष्य में बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए सभी जिलों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र की उत्पाद दुकानों से लाइसेंस फीस अग्रिम उत्पाद परिवहन कर और जमानत की अंतर राशि सात फरवरी तक ऑनलाइन या बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से जमा कराएं. इसके बाद इसकी जानकारी आयुक्त उत्पाद को भेजनी होगी.

ई-बैंक गारंटी की अंतिम तिथि
यदि कोई लाइसेंसधारी राशि जमा करने के बाद ई-बैंक गारंटी देना चाहता है तो उसे 30 अप्रैल 2026 से पहले जमा करना होगा. विभाग ने इस प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने के लिए स्पष्ट तारीख तय कर दी है ताकि नए वित्तीय वर्ष से पहले सभी औपचारिकताएं पूरी की जा सकें. राज्य में शराब की खुदरा बिक्री फिलहाल निजी दुकानदारों के माध्यम से हो रही है. इससे सरकार को राजस्व तो मिल रहा है लेकिन कई दुकानदार बिक्री से मिलने वाले लाभ को लेकर असंतुष्ट हैं. कुछ ने तो दुकान सरेंडर करने तक की बात कही है.

दुकानदारों की बढ़ती चिंता
उत्पाद अधिकारी दुकानदारों को भरोसा दिला रहे हैं कि आने वाले समय में बिक्री में सुधार होगा. इसी बीच खुदरा शराब दुकानदार संघ का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के सचिव से मुलाकात करेगा और अपनी समस्याएं सामने रखेगा.

उत्पाद विभाग द्वारा राजस्व लक्ष्य में वृद्धि का निर्णय सरकार की आय बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है. हालांकि जमीनी स्तर पर दुकानदारों की परेशानी इस बात का संकेत देती है कि नीति और व्यावहारिक हालात के बीच संतुलन जरूरी है. आने वाले दिनों में विभाग और कारोबारियों के बीच होने वाली बातचीत यह तय करेगी कि यह व्यवस्था कितनी प्रभावी बन पाती है.
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