Jharkhand Politics: झारखंड में नगर निकाय चुनाव की तैयारी जैसे जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे वैसे राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होती जा रही है. औपचारिक प्रक्रिया शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है, जिसने चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
23 फरवरी को होना है मतदान
राज्य में नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया 29 जनवरी से शुरू हुई है और 23 फरवरी को मतदान होना तय है. इसी बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि चुनाव पुराने मतदाता सूची के आधार पर कराए जाने की तैयारी हो रही है.
पुरानी सूची से बाहर रह जाएंगे नए मतदाता
मरांडी के अनुसार अक्टूबर 2024 की मतदाता सूची को ही आधार बनाया जा रहा है, वही सूची जिससे विधानसभा चुनाव कराए गए थे. उनका कहना है कि 1 अक्टूबर 2024 के बाद जिन मतदाताओं ने नाम जुड़वाया है या स्थान परिवर्तन कराया है, वे इस निकाय चुनाव में वोट नहीं डाल सकेंगे और न ही प्रत्याशी बन सकेंगे.
एक्स पर जताई नाराजगी
नेता प्रतिपक्ष ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि पिछले करीब 15 महीनों में जुड़े लाखों मतदाता अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित रह जाएंगे. उन्होंने इसे लोकतंत्र की भावना के विपरीत बताया और कहा कि राज्य सरकार को अपडेट मतदाता सूची के आधार पर ही चुनाव कराना चाहिए, ताकि युवा मतदाता भी भागीदारी निभा सकें.
मुख्यमंत्री पर तीखा हमला
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को टैग करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि संविधान और लोकतंत्र की दुहाई देना तब शोभा नहीं देता, जब व्यवहार उसके विपरीत हो. उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक मूल्यों की बात करते हुए सरकार असंवैधानिक कदम उठा रही है.
मरांडी ने मांग की कि निकाय चुनाव नई और अपडेट मतदाता सूची से कराए जाएं, ताकि कोई भी मतदाता अपने अधिकार से वंचित न रहे और चुनाव प्रक्रिया पर किसी तरह का संदेह न बने.
यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनावी माहौल तेजी से बन रहा है. मतदाता सूची को लेकर उठे सवाल सरकार और विपक्ष के बीच टकराव को और बढ़ा सकते हैं. अगर समय रहते स्थिति स्पष्ट नहीं की गई तो यह मुद्दा चुनाव की विश्वसनीयता पर असर डाल सकता है.