Jharkhand Politics: झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बयानों और कार्यशैली को लेकर तीखा हमला बोला है. शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री एक ओर राज्य में निवेश और व्यापार लाने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर व्यापारियों को अपमानित कर उन्हें धमकाने का काम करते हैं.
आदित्य साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री व्यापार और निवेश के नाम पर विदेश दौरे करते हैं और वहां से व्यापारियों को झारखंड लाने का दावा करते हैं, लेकिन जो व्यापारी यहां आना चाहते हैं, उनके साथ डर और दबाव का माहौल बनाया जाता है. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री चाहते हैं कि व्यापारी उनके दरबार में हाजिरी लगाएं.
घाटशिला उपचुनाव बयान पर सवाल
साहू ने घाटशिला उपचुनाव के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए बयान का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय मुख्यमंत्री ने कहा था कि व्यापारी पहले पैर पकड़ते हैं और बाद में गला दबाते हैं. उन्होंने इसे निंदनीय बताते हुए कहा कि संवैधानिक पद पर बैठकर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना ठीक नहीं है.
खनिज ढुलाई और कोयला पर निशाना
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने झारखंड में खनिजों की अवैध ढुलाई को लेकर भी राज्य सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि झारखंड किसी पार्टी या परिवार की जागीर नहीं है. मुख्यमंत्री बार-बार खनिज और कोयले की ढुलाई रोकने की धमकी देते हैं, जिससे राज्य की छवि खराब होती है.
राष्ट्रविरोधी सोच का आरोप
आदित्य साहू ने कहा कि भारत को खंड-खंड में देखने की सोच राष्ट्रविरोधी है. यदि झारखंड का कोयला दूसरे राज्यों में जाता है, तो दूसरे राज्यों से भी झारखंड में कई आवश्यक वस्तुएं आती हैं. उन्होंने कहा कि अगर किसी चीज को रोका जाना चाहिए तो वह है भ्रष्टाचार, जमीन लूट, धमकी, अपहरण, महिलाओं के साथ अपराध और खनिजों की लूट.
वादों पर उठाए सवाल
साहू ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि छह वर्षों के कार्यकाल में आखिर उन्होंने क्या किया है. उन्होंने कहा कि पांच लाख रोजगार देने, बेरोजगारी भत्ता देने और छात्रों को स्टाइपेंड देने के वादे आज तक पूरे नहीं हुए हैं. राज्य में न प्रशासन पर नियंत्रण है और न ही विकास दिखाई देता है.
केंद्र पर बकाया के आरोप पर प्रतिक्रिया
राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार पर बकाया राशि को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर भी आदित्य साहू ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पिछले छह वर्षों से केवल “बकाया है” का नारा लगा रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं करते कि आखिर कौन-सा बकाया है. उन्होंने मुख्यमंत्री से इस पर साफ जवाब देने की मांग की.