Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने मुआवजा एवं वंशावली विवाद से जुड़े एक अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान नामकुम अंचल अधिकारी (सीओ) की अनुपस्थिति पर कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट के आदेश के बावजूद सीओ के पेश नहीं होने पर खंडपीठ ने उनकी भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए स्पष्टीकरण और अनुपालन शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है.
न्यायिक आदेशों की अवहेलना की गई
यह मामला मंशा सिंह उर्फ राजेश सिंह द्वारा दायर अपील से संबंधित है, जिसमें पहले से पारित न्यायिक आदेशों का अब तक अनुपालन नहीं किया गया है. इस प्रकरण की सुनवाई न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद एवं न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने की. कोर्ट ने कहा कि न्यायिक आदेशों की अवहेलना न केवल कानून के शासन को कमजोर करती है, बल्कि आम नागरिकों के न्याय पाने के अधिकार पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है.
सीओ को देना होगा स्पष्टीकरण
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नामकुम सीओ न तो अदालत में उपस्थित हुए और न ही व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए कोई आवेदन प्रस्तुत किया. खंडपीठ ने इस आचरण को गंभीर लापरवाही मानते हुए सीओ को निर्देश दिया कि वे अपनी अनुपस्थिति का कारण स्पष्ट करते हुए स्पष्टीकरण दें और साथ ही आदेश के अनुपालन से संबंधित शपथपत्र भी दाखिल करें.
मामले की सुनवाई के दौरान रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री स्वयं कोर्ट में उपस्थित हुए. उन्होंने खंडपीठ को आश्वस्त किया कि कोर्ट के आदेशों का अनुपालन दो सप्ताह के भीतर सुनिश्चित कर दिया जाएगा.
खंडपीठ ने अपने 4 फरवरी 2026 के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले से जुड़ी अपील (एलपीए), जिसमें 18 दिसंबर 2023 को आदेश पारित हुआ था, उसका अब तक पालन नहीं किया गया है और न ही संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई शो-कॉज दाखिल किया गया. इसी कारण रांची डीसी और नामकुम सीओ को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था.
अगली सुनवाई के लिए 23 फरवरी को होगी
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 फरवरी की तिथि निर्धारित की है. यह प्रकरण केवल एक प्रशासनिक चूक का नहीं, बल्कि उन लोगों के अधिकारों से जुड़ा है जो वर्षों से मुआवजा और वंशावली विवाद में न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं. अदालत की सख्ती इस बात का संकेत है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण आम नागरिकों के अधिकारों का हनन अब स्वीकार्य नहीं होगा.