Jamshedpur Breaking: जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) क्षेत्र में अवैध निर्माण और नक्शा विचलन से जुड़े एक बड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चार भवनों को फिलहाल राहत दी है. शीर्ष अदालत ने झारखंड हाईकोर्ट के तोड़फोड़ आदेश पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है. यह आदेश न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने गंगा रीजेंसी एलएलपी बनाम राकेश कुमार झा एवं अन्य मामले में सुनवाई के दौरान दिया.
चार याचिकाकर्ताओं को मिली अस्थायी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने गंगा रीजेंसी, पटियाला विंस बिल्डिंग सहित अन्य दो निर्माणों के संबंध में फिलहाल कोई भी तोड़फोड़ कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया है. अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर मामले को अन्य जुड़े मामलों के साथ टैग करने का निर्देश भी दिया है. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विनीत सिन्हा और देवेश अजमानी ने पक्ष रखा.
बिना सुनवाई के दिया गया आदेश
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि झारखंड हाईकोर्ट ने तीन अधिवक्ताओं की समिति की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन को कार्रवाई का निर्देश दिया था, लेकिन रिपोर्ट तैयार करने से पहले उन्हें सुनवाई का कोई अवसर नहीं दिया गया.
उनका कहना था कि यदि भवन तोड़े जाते हैं तो उन्हें अपूरणीय नुकसान होगा और वे बिना किसी सुनवाई के बेदखल कर दिए जाएंगे. साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि वे मूल जनहित याचिका में पक्षकार नहीं थे, फिर भी उनके खिलाफ आदेश पारित कर दिया गया.
हाईकोर्ट के आदेशों को दी गई चुनौती
सुप्रीम कोर्ट में झारखंड हाईकोर्ट के 14 और 28 जनवरी 2026 को पारित आदेशों को चुनौती दी गई है. हाईकोर्ट ने राकेश कुमार झा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जेएनएसी को प्रतिवादियों के निर्माण तोड़ने का निर्देश दिया था.
इसके बाद दायर आवेदनों को भी 28 और 29 जनवरी 2026 को खारिज कर दिया गया था, जिसके खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है.
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में जेएनएसी को सभी 24 प्रतिवादियों के अवैध निर्माण गिराने का निर्देश दिया था. अब सुप्रीम कोर्ट के स्टेटस-क्वो आदेश से चार मामलों में फिलहाल कार्रवाई पर विराम लग गया है.