Jharkhand News: झारखंड सरकार ने मंईयां सम्मान योजना की लाभार्थी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. सरकार बैंकों के माध्यम से एकमुश्त 20 हजार रुपये का आसान लोन देने के लिए “मुख्यमंत्री मंईयां उद्यम योजना” लाने जा रही है. यह योजना स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है.
सरकार और बैंकों में बनी सहमति
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति, भारतीय रिजर्व बैंक, नाबार्ड और विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर योजना पर चर्चा की. बैठक में बैंकों ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताई. अब वित्त विभाग बैंकों के साथ मिलकर पात्रता और अन्य मानदंड तय करेगा.
बजट में प्रस्ताव, 8 मार्च से संभावित शुरुआत
सूत्रों के अनुसार, इस योजना को आगामी बजट में शामिल किया जाएगा. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को इसकी औपचारिक शुरुआत की जा सकती है. फिलहाल यह तय किया गया है कि 45 वर्ष तक की मंईयां लाभार्थियों को इस योजना के तहत लोन दिया जाएगा.
लोन की शर्तें और अवधि
लोन की राशि पांच वर्षों में आसान किस्तों में चुकाई जा सकेगी. उद्देश्य यह है कि 50 वर्ष की आयु पूरी होने पर यदि कोई लाभार्थी योजना से बाहर होती है, तो ऋण वसूली का बोझ न रहे.
सरल और त्वरित आवेदन प्रक्रिया
लाभार्थियों को केवल आधार कार्ड और पिछले छह माह के बैंक खाते का विवरण देना होगा. दस्तावेजी प्रक्रिया के लिए मात्र एक रुपये के रेवेन्यू स्टांप का उपयोग किया जाएगा. बैंकों में “मंईयां ऋण डेस्क” बनाए जाएंगे, जहां आवेदन के सात दिनों के भीतर लोन स्वीकृत किया जाएगा. ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक सखी महिलाओं को प्रक्रिया की जानकारी देंगी.
डिजिटल निगरानी के लिए पोर्टल
योजना के लिए एक विशेष “मंईयां ऋण पोर्टल” विकसित किया जाएगा, जिससे ऋण वितरण, भुगतान की स्थिति और अपग्रेड की जानकारी ऑनलाइन ट्रैक की जा सकेगी. पात्रता सत्यापन की जिम्मेदारी सीधे बैंकों को दी जाएगी.
स्वरोजगार के अवसर
झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी लाभार्थियों को व्यवसाय चयन और प्रशिक्षण में तकनीकी सहयोग देगी. महिलाएं मनिहारी दुकान, सिलाई केंद्र, मशरूम उत्पादन, मसाला प्रसंस्करण और पशुपालन जैसे छोटे उद्यम शुरू कर सकेंगी.
यह योजना महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें उद्यमी बनाने की दिशा में एक ठोस प्रयास है. आसान लोन, डिजिटल निगरानी और प्रशिक्षण के साथ यह पहल राज्य में महिला स्वरोजगार को नई गति दे सकती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत आधार प्रदान कर सकती है.