Jharkhand News: झारखंड के युवाओं के लिए रोजगार और तकनीकी प्रशिक्षण के नए अवसर खुलने जा रहे हैं. सी-डैक एवं एसटीपीआई देवघर द्वारा आयोजित हुल उन्नयन कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर सांसद एवं संसदीय स्थायी समिति (संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी) के अध्यक्ष डॉ. निशिकांत दुबे ने देवघर में विमान और हेलीकॉप्टर मेंटेनेंस प्रशिक्षण केंद्र तथा वीजा सेंटर खोलने की घोषणा की. यह केंद्र इसी वर्ष के अंत तक शुरू होने की संभावना है.
विमान और हेलीकॉप्टर मेंटेनेंस का प्रशिक्षण
कार्यक्रम में सांसद ने कहा कि देवघर में हवाई यातायात तेजी से बढ़ेगा और आने वाले समय में यहां विमान व हेलीकॉप्टरों की संख्या में वृद्धि होगी. इसी को ध्यान में रखते हुए उनके रखरखाव और मरम्मत के लिए एक विशेष मेंटेनेंस एवं प्रशिक्षण केंद्र खोला जाएगा, जहां स्थानीय युवा तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे.
ड्रोन और पायलट प्रशिक्षण की सुविधा
इस केंद्र में ड्रोन तकनीक का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. साथ ही पायलट प्रशिक्षण की सुविधा शुरू करने की योजना है, ताकि देवघर और आसपास के क्षेत्रों के युवा आधुनिक विमानन क्षेत्र में अपना करियर बना सकें.
देवघर में खुलेगा वीजा सेंटर
डॉ. दुबे ने बताया कि अभी वीजा बनवाने के लिए लोगों को दिल्ली, मुंबई या कोलकाता जाना पड़ता है. अब यही सुविधा देवघर में ही शुरू की जाएगी, जिससे आम लोगों को समय और खर्च दोनों में राहत मिलेगी.
1.35 लाख युवाओं को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
उन्होंने कहा कि झारखंड के 1.35 लाख बच्चों को सी-डैक के माध्यम से विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा. प्रशिक्षण के बाद उन्हें प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे, जिससे वे देश-विदेश में रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकेंगे. कई युवा आगे चलकर मास्टर ट्रेनर के रूप में भी कार्य करेंगे. कार्यक्रम में बताया गया कि यह क्षेत्र साइबर अपराध से प्रभावित है. प्रशिक्षित युवा साइबर जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभाएंगे, जिससे साइबर अपराध पर नियंत्रण में मदद मिलेगी.
देवघर में सी-डैक का 13वां सेंटर
देश में अभी सी-डैक के 12 सेंटर संचालित हैं. सांसद ने कहा कि प्रयास किया जाएगा कि देवघर में सी-डैक का 13वां सेंटर शुरू किया जाए. इसके साथ ही सी-डैक देवघर एम्स के साथ मिलकर आदिवासी बच्चों में सिकल सेल एनीमिया के इलाज और रोकथाम के लिए भी तकनीकी समाधान पर काम कर रहा है.
देवघर में विमानन, तकनीक और वीजा जैसी सुविधाओं की शुरुआत न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी, बल्कि इस क्षेत्र को तकनीकी और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. इससे स्थानीय युवाओं का पलायन रुकेगा और देवघर एक उभरते तकनीकी केंद्र के रूप में पहचान बना सकेगा.