Jharkhand News: रांची-लोहरदगा-टोरी रेलखंड पर कोयल नदी पुल में आई गंभीर तकनीकी खराबी के कारण बंद हुई रेल सेवाएं अब बहाली की ओर बढ़ रही हैं. रेलवे ने मरम्मत कार्य को अंतिम चरण में पहुंचा दिया है और सुरक्षा जांच पूरी होते ही 15 मार्च के बाद इस रूट पर ट्रेनों का संचालन दोबारा शुरू होने की संभावना जताई है.
कोयल नदी पर बने पुल संख्या 115 में पिलर संख्या चार और पांच के बीच संरचनात्मक दरार सामने आने के बाद रेलवे को एहतियातन इस मार्ग पर टोरी तक की सीधी रेल सेवाएं रोकनी पड़ी थीं. यह पुल नागजुआ और लोहरदगा स्टेशन के बीच स्थित है और इस रेलखंड की जीवनरेखा माना जाता है.
प्रारंभिक तकनीकी जांच में यह सामने आया कि दोनों पिलर धीरे-धीरे एक ओर झुकने लगे थे, जिससे पुल की स्थिरता पर सीधा असर पड़ा. इसी वजह से रेलवे को तत्काल सेवा रोककर मरम्मत की रणनीति बदलनी पड़ी.
अब रेलवे द्वारा आधुनिक तकनीक के जरिए पिलरों को काटने और बदलने का कार्य किया जा रहा है. इस प्रक्रिया में डायमंड कटर का इस्तेमाल हो रहा है. भारी संरचना को संभालने के लिए रायपुर से 350 टन क्षमता वाली क्रेन मंगाई गई है, जिससे जोखिम को न्यूनतम रखा जा सके.
मरम्मत के अगले चरण में पुल पर दो नए स्टील गार्डर लगाए जाएंगे, जिनकी लंबाई लगभग 24 मीटर होगी. ये गार्डर कोलकाता में तैयार किए जा रहे हैं और इनके लगने के बाद पुल की भार सहने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी.
घटना के बाद रेलवे ने पूरे रांची-लोहरदगा-टोरी रेलखंड के बड़े पुलों की तकनीकी स्थिति की समीक्षा कराने का निर्णय लिया है. इसके तहत 20 प्रमुख पुलों का जियो-टेक्निकल सर्वे कराया जाएगा, ताकि मिट्टी की प्रकृति, नींव की मजबूती और जल प्रवाह के असर को समझा जा सके.
फिलहाल इस रूट की कई प्रमुख ट्रेनें वैकल्पिक मार्गों से चलाई जा रही हैं, जिससे यात्रियों को अतिरिक्त समय और असुविधा झेलनी पड़ रही है. रेलवे प्रशासन का कहना है कि मरम्मत पूरी होने के बाद सुरक्षा मानकों की गहन जांच होगी और उसी के बाद ट्रेनों को पटरी पर लौटाया जाएगा.
यह घटना रेलवे ढांचे की नियमित तकनीकी निगरानी की जरूरत को उजागर करती है. समय रहते उठाए गए कदम से एक बड़े हादसे की आशंका टल गई है. अब चुनौती यह है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आए और यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहे.