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  • 2026-02-09

Jamshedpur Karim City: जमशेदपुर के विश्वदीप जिस्त का बॉलीवुड में बजा डंका, ए.आर. रहमान की फिल्म गांधी टॉक्स में लिखे गीत

Jamshedpur: जमशेदपुर के परसुडीह के रहने वाले गीतकार विश्वदीप जिस्त ने इसे सच कर दिखाया है। ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान की बहुचर्चित साइलेंट फिल्म गांधी टॉक्स में विश्वदीप के लिखे गीतों में शामिल है, “निंदिया परी” समेत कुल तीन गीत इस फिल्म में शामिल हैं। उन्हें बॉलीवुड के शिखर पर ला खड़ा किया है।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

विश्वदीप ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा जमशेदपुर में पूरी की और करीम सिटी कॉलेज से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की। साल 2013 में, बिना किसी गॉडफादर के, वे अपने सपनों के पीछे मुंबई चले गए। शुरुआत में कई लोगों ने उनका हौसला तोड़ने की कोशिश की, लेकिन विश्वदीप ने हार नहीं मानी। लगभग एक दशक के कड़े संघर्ष के बाद, आज उनके खाते में 20 से ज्यादा फ़िल्मी और गैर-फ़िल्मी गीत दर्ज हैं।

ए.आर. रहमान के साथ काम करना सपना सच होने जैसा

विश्वदीप बताते हैं कि ए.आर. रहमान जैसे दिग्गज के साथ काम करना उनके लिए अकल्पनीय था। फिल्म गांधी टॉक्स में उनका लिखा गीत निंदिया परी एक मर्मस्पर्शी लोरी है, जिसे रहमान साहब ने बेहद पसंद किया। म्यूजिक लॉन्च के दौरान जब खुद रहमान ने उनकी तारीफ की, तो विश्वदीप की आंखों में बरसों के संघर्ष के आंसू और चेहरे पर जीत की मुस्कान थी।

पिता की विरासत और लेखन की प्रेरणा

विश्वदीप के लेखन की जड़ें उनके घर में ही थीं। उन्होंने साझा किया कि बचपन में उन्हें पता चला कि उनके पिता मनोज कांति सेन द्वारा लिखे एक बंगाली गीत को स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने आवाज दी थी, लेकिन उन्हें कभी उसका क्रेडिट नहीं मिला। इस टीस ने विश्वदीप को एक सफल गीतकार बनने के लिए प्रेरित किया। महज 13 साल की उम्र से शुरू हुआ शायरी का यह सिलसिला आज बॉलीवुड की बड़ी फिल्मों तक पहुँच चुका है।

गांधी टॉक्स और मानवीय मूल्य

डायरेक्टर किशोर पांडुरंग बेलेकर की फिल्म गांधी टॉक्स एक साइलेंट फिल्म है। बिना संवादों वाली इस फिल्म में संगीत और गीतों की भूमिका सबसे अहम है। विश्वदीप के गीत दर्शकों को कहानी से जोड़ने का काम करते हैं। इससे पहले उन्होंने खामोशी, वो भी दिन थे और दंगे जैसी फिल्मों के लिए भी गीत लिखे हैं। उनके शब्दों को हरिहरन, अलका याग्निक, मोहित चौहान और पापोन जैसे दिग्गजों ने अपनी आवाज से सजाया है।आज पूरा जमशेदपुर विश्वदीप ज़ीस्त की इस उपलब्धि पर गौरवान्वित है। उनकी यह कहानी उन हजारों युवाओं के लिए मिसाल है जो छोटे शहरों से बड़े सपने लेकर निकलते हैं।

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