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  • 2026-02-10

Jharkhand News: JPSC का 2026 परीक्षा-नियुक्ति कैलेंडर सवालों के घेरे में, तय तारीखों पर नहीं हो रही प्रक्रिया

Jharkhand News: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने जनवरी 2026 में परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया का विस्तृत कैलेंडर जारी किया था, लेकिन महज एक महीने के भीतर ही यह कैलेंडर फेल होता नजर आ रहा है. आयोग द्वारा तय की गई तिथियों पर न तो प्रक्रिया शुरू हो रही है और न ही कोई स्पष्ट सूचना जारी की जा रही है.

तय तारीख पर नहीं हुआ अभिलेख सत्यापन
जेपीएससी कैलेंडर के अनुसार 10 फरवरी को सहायक प्राध्यापक के हो और पंचपरगनिया विषय के अभ्यर्थियों का दस्तावेज सत्यापन प्रस्तावित था. लेकिन उस दिन न तो कोई प्रक्रिया हुई और न ही आयोग की वेबसाइट या कार्यालय से कोई आधिकारिक नोटिस जारी किया गया. इससे अभ्यर्थियों में भ्रम और नाराजगी बढ़ गई है.

कई विषयों की नियुक्ति पहले ही लटकी
आयोग द्वारा जारी कैलेंडर में स्टैच्यूट्स, मैथिली, लेबर एंड सोशल वेलफेयर सहित कुल छह विषयों में नियुक्ति प्रक्रिया का उल्लेख था. इनमें से कई विषयों की तिथियां पहले ही बिना कारण टल चुकी हैं, जिससे पूरे शेड्यूल पर सवाल खड़े हो गए हैं.

दूर-दराज से आने वाले अभ्यर्थी परेशान
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे आयोग के कैलेंडर को आधार मानकर रांची आने की तैयारी कर रहे थे. कई उम्मीदवारों ने यात्रा और ठहरने की व्यवस्था भी कर ली थी, लेकिन अंतिम समय तक कोई सूचना नहीं मिलने से वे असमंजस और आर्थिक नुकसान की स्थिति में फंस गए.

पहले भी बदली जा चुकी हैं तिथियां
जेपीएससी पर पहले भी कई नियुक्ति प्रक्रियाओं में देरी और बदलाव के आरोप लग चुके हैं. एपीपी के 134 नियमित पद, 26 बैकलॉग पद, विभिन्न चिकित्सा पदों और विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व सीनियर साइंटिस्ट की नियुक्तियों में भी आयोग बिना स्पष्ट सूचना के तिथियां बदल चुका है.

अभ्यर्थियों की मांग
अभ्यर्थियों ने आयोग से मांग की है कि वह अपने ही जारी कैलेंडर के अनुसार पारदर्शिता के साथ काम करे और हो व पंचपरगनिया विषय के सहायक प्राध्यापक अभिलेख सत्यापन को लेकर तत्काल स्पष्ट नोटिस जारी करे, ताकि अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके.

जेपीएससी का कैलेंडर बार-बार फेल होना सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है. पारदर्शिता और समयबद्धता किसी भी चयन आयोग की विश्वसनीयता की बुनियाद होती है. अगर आयोग अपने ही शेड्यूल का पालन नहीं करेगा, तो अभ्यर्थियों का भरोसा कमजोर होना तय है.
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