Palamu Crime News: झारखंड के पलामू जिले से दहेज उत्पीड़न और हत्या का एक हृदयविदारक मामला सामने आया है. यहां एक 22 वर्षीय महिला की कथित तौर पर हत्या करने के बाद साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से उसके शव को जला दिया गया. मृतका मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सोनभद्र की निवासी थी, जिसकी शादी महज 11 महीने पहले हुई थी.
प्रताड़ना और साक्ष्य मिटाने का आरोप
मृतका के पिता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, विवाह के बाद से ही उनकी बेटी को दहेज के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था. पिता का आरोप है कि 13 फरवरी को ससुराल वालों ने मिलकर उसकी हत्या कर दी और अपराध को छिपाने के लिए शव को आग के हवाले कर दिया. घटना के बाद से ही ससुराल पक्ष के सभी सदस्य घर छोड़कर फरार हैं.
पुलिसिया कार्रवाई और बरामदगी
विश्रामपुर के एसडीपीओ आलोक कुमार ने जानकारी दी कि शनिवार को गांव के समीप स्थित जंगल से महिला की हड्डियां और अन्य शारीरिक अवशेष बरामद किए गए हैं. पांडू थाना प्रभारी वागेश कुमार राय के नेतृत्व में फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य एकत्रित कर लिए हैं और जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. फिलहाल पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए सघन तलाशी अभियान चला रही है.
पूर्व की घटनाओं का संदर्भ
दहेज हत्या की यह क्रूर प्रवृत्ति राज्य में चिंता का विषय बनी हुई है. गौरतलब है कि पिछले महीने गिरिडीह जिले के चिनो गांव में भी इसी प्रकार की वारदात सामने आई थी, जहां एक 21 वर्षीय महिला की हत्या कर उसके शव को जला दिया गया था. उस मामले में भी पिता ने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज की मांग को लेकर हत्या का आरोप लगाया था.
दहेज प्रथा का सामाजिक अभिशाप
पलामू और गिरिडीह की ये घटनाएं समाज में जकड़ी दहेज प्रथा की जड़ों और कानून के प्रति अपराधियों में व्याप्त निडरता को उजागर करती हैं. शिक्षा और कानूनी जागरूकता के बावजूद दहेज के नाम पर होने वाली हिंसा में साक्ष्य मिटाने के लिए शव को जलाने जैसे जघन्य तरीके अपनाना न केवल मानवीय मूल्यों का पतन है, बल्कि यह न्याय व्यवस्था के लिए भी एक गंभीर चुनौती है. ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए त्वरित न्यायिक प्रक्रिया और सामाजिक बहिष्कार जैसे कड़े कदम उठाना अनिवार्य जान पड़ता है.