कुचलने की कोशिश और बंधक बनाने का आरोप
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मर्सिडीज सवार युवक को घसीटते हुए ले जा रहा था. रास्ते में जब तैनात होमगार्ड के जवानों ने कार रोकने का इशारा किया, तो आरोपी ने उन पर भी गाड़ी चढ़ाने का प्रयास किया. यहीं नहीं, आरोपी युवक को अपने घर ले गया और वहां उसे बंधक बनाकर उसके साथ मारपीट भी की गई.
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही रांची पुलिस एक्शन मोड में आई. पुलिस ने आरोपी का पीछा किया और उसके ठिकाने पर छापेमारी कर बंधक बनाए गए युवक को सकुशल मुक्त कराया. पीड़ित युवक बेहद डरा हुआ है और उसे गंभीर चोटें आई हैं. पुलिस ने मौके से लग्जरी मर्सिडीज कार को जब्त कर लिया है और आरोपी को गिरफ्तार कर थाने ले आई है. आरोपी की पहचान हाई कोर्ट के अधिवक्ता मनोज टंडन के रूप में हुई है.
हाई कोर्ट का सख्त रुख, नो रिलीफ
यह मामला तूल पकड़ते ही झारखंड हाई कोर्ट की दहलीज तक जा पहुंचा. एडवोकेट एसोसिएशन ने चीफ जस्टिस एम.एस. रामचंद्र राव की बेंच के समक्ष मामला रखते हुए कहा कि अधिवक्ता मनोज टंडन को हिरासत में लिया गया है और थाने के बाहर जुटी उग्र भीड़ से उनकी जान को खतरा है, इसलिए उन्हें सुरक्षा और राहत दी जाए.
मामले की गंभीरता और तथ्यों को देखते हुए चीफ जस्टिस की बेंच ने बेहद सख्त टिप्पणी की. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कानून से ऊपर कोई नहीं है. पुलिस इस मामले में नियम सम्मत कार्रवाई करे. कोर्ट ने अधिवक्ता को किसी भी प्रकार की न्यायिक राहत देने से साफ इनकार कर दिया. हालांकि, भीड़ के खतरे को देखते हुए कोर्ट ने महाधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे पुलिस से बात कर आरोपी की सुरक्षा सुनिश्चित करें ताकि कानून व्यवस्था न बिगड़े.
पढ़ाई क्या कहा हाई कोर्ट
इस घटना ने शहर में रसूखदारों की दबंगई पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं, लेकिन हाई कोर्ट की टिप्पणी ने साफ कर दिया है कि अपराध के मामले में प्रोफेशन सुरक्षा कवच नहीं बनेगा.