सूत्रों के अनुसार, JAP-IT ने हाल ही में इस कार्य के लिए टेंडर जारी किया था। मंगलवार को निविदा की शर्तों एवं नियमों को लेकर बोलीदाताओं के सुझाव जानने के उद्देश्य से प्री-बिड बैठक आयोजित की गई।
योजना के तहत प्रत्येक थाना परिसर के महत्वपूर्ण स्थानों जैसे कमरों, हाजत (कस्टडी रूम), प्रभारी कक्ष, थाना परिसर के बाहर तथा पीछे के हिस्से में कैमरे लगाए जाएंगे। इससे थानों की गतिविधियों की निगरानी सुनिश्चित की जा सकेगी।
परियोजना के अंतर्गत तीन प्रकार के कैमरे लगाए जाएंगे, बुलेट, डोम और रोटेटिंग कैमरे। बुलेट कैमरे का उपयोग बड़े क्षेत्र की निगरानी के लिए किया जाएगा, डोम कैमरे पैनोरमिक व्यू प्रदान करेंगे, जबकि रोटेटिंग कैमरे पूरे परिसर की निगरानी में सक्षम होंगे।
गृह विभाग ने सर्वेक्षण के बाद प्रत्येक थाना के लिए आवश्यक कैमरों की संख्या की सूची JAP-IT को सौंप दी है। उल्लेखनीय है कि यह पहल नवंबर 2025 में झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद की जा रही है। यह आदेश तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान दिया था।
याचिकाकर्ता शौबिक बनर्जी ने चेक बाउंस मामले में दो दिनों तक कथित अवैध हिरासत में रखे जाने के आरोप के बाद जनहित याचिका दायर की थी। अदालत के निर्देश के बाद अब राज्य सरकार थानों में CCTV व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू करने जा रही है।
सरकार की इस पहल से थानों में पारदर्शिता बढ़ने और मानवाधिकार संरक्षण को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।