डालसा सचिव राकेश रौशन ने बताया कि निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह जांचना था कि जेल में बंदियों को जाति के आधार पर अलग रखा जा रहा है या उनसे कोई अलग तरह का कार्य कराया जा रहा है या नहीं। निरीक्षण दल में अपर न्यायायुक्त अमित शेखर, डालसा सचिव राकेश रौशन, एसडीओ कुमार रजक, जेल अधीक्षक कुमार चंद्रशेखर, एलएडीसी चीफ पीके श्रीवास्तव समेत अन्य अधिकारी शामिल थे। यह निरीक्षण झालसा के कार्यपालक अध्यक्ष सह जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद के दिशा-निर्देश पर किया गया।
टीम ने बंदियों के भोजन, साफ-सफाई और जेल परिसर की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। जेल की लाइब्रेरी का निरीक्षण कर प्रशासन को साफ-सफाई बनाए रखने और खाद्य सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों की शिक्षा व्यवस्था सुधारने तथा डिस्पेंशरी में बंदियों की नियमित स्वास्थ्य जांच कराने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए।
पिछले साल दो कैदियों का वीडियो हुआ था वायरल
इससे पहले होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार पिछले साल उस समय चर्चा में आया था, जब जेल के अंदर एक हॉल में दो कैदियों के नृत्य करने से जुड़ा वीडियो वायरल हुआ था। बारह नवंबर को इससे जुड़ी खबर प्रकाशित होने के तुरंत बाद आईजी (जेल) सुदर्शन मंडल ने ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार के सहायक जेलर देवनाथ राम और वार्डर बिनोद यादव को निलंबित कर दिया था।
वहीं इस मामले को लेकर झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने 14 नवंबर को स्वतः संज्ञान लेते हुए, जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू की थी। खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि इस घटना को शर्मनाक बताया था। अदालत ने कहा था कि यह वीडियो जेल में अनुशासन की पूरी तरह कमी को दर्शाता है। वीडियो में दिखाई दे रहे कैदी शराब घोटाले में संलिप्तता के आरोप में हिरासत में बंद थे।