किल चेन का होगा आधुनिकीकरण
बुधवार को आयोजित स्मार्टाइजिंग द किल चेन सेमिनार में सेना के आला अधिकारियों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य युद्ध की प्रक्रिया पहचान से लेकर लक्ष्य भेदने तक को पूरी तरह डिजिटल और स्वायत्त बनाना है।सटीक निशाना एआई की मदद से हथियारों और मिसाइलों की सटीकता कई गुना बढ़ जाएगी। ड्रोन, टैंक और सैन्य वाहनों को एआई के जरिए इतना समझदार बनाया जा रहा है कि वे युद्ध के मैदान में पलक झपकते ही निर्णय ले सकें।
मरम्मत नहीं, पूर्वानुमान पर जोर
इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस के रूप में दिखेगा। अब सेना के उपकरण खराब होने का इंतजार नहीं करना होगा। मशीनें खुद बताएंगी कि उनका कौन सा हिस्सा खराब होने वाला है। एआई यह पहले ही भांप लेगा कि किस मोर्चे पर कब और कितने संसाधनों जैसे राशन, गोला-बारूद की जरूरत पड़ने वाली है।
जीरो डाउनटाइम, युद्ध के समय तकनीकी खराबी के कारण हथियारों के रुकने की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।आने वाले समय में तकनीक ही जीत का आधार बनेगी। हम एक ऐसी सेना की ओर बढ़ रहे हैं जहाँ डेटा सबसे बड़ा हथियार होगा। विशेषज्ञभारतीय सेना की यह पहल न केवल सीमाओं की सुरक्षा को पुख्ता करेगी, बल्कि तकनीकी मोर्चे पर भारत को दुनिया के अग्रणी देशों की कतार में खड़ा कर देगी।