Kolhan University: जमशेदपुर समेत कोल्हान विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले 12 बीएड कॉलेजों ने चार वर्षीय इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (आईटीईपी) शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है. राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के नए नियमों के तहत अब इन संस्थानों को एकल इकाई के बजाय बहु-विषयक (मल्टी-डिसिप्लिनरी) संस्थानों के रूप में संचालित होना होगा. इसी बदलाव को स्वीकार करते हुए इन कॉलेजों ने आवेदन प्रक्रिया पूरी की है, जिससे छात्रों को एक ही परिसर में स्नातक और बीएड की डिग्री साथ मिल सकेगी.
2030 के बाद अनिवार्य होगा चार वर्षीय कोर्स
नई शिक्षा नीति के मुताबिक, आगामी वर्षों में शिक्षक बनने के मानकों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. साल 2028 के बाद शिक्षक बनने के लिए चार वर्षीय आईटीईपी ही मुख्य मार्ग होगा, जबकि 2030 तक पारंपरिक दो वर्षीय बीएड कोर्स को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा. 2030 के बाद स्कूलों में नियुक्ति के लिए चार वर्षीय एकीकृत डिग्री ही न्यूनतम योग्यता मानी जाएगी. ऐसे में जो स्टैंड-अलोन कॉलेज किसी बड़े डिग्री कॉलेज के साथ एमओयू या विलय नहीं करेंगे, उनकी मान्यता समाप्त हो जाएगी.
छात्रों का बचेगा एक साल
इस नए इंटीग्रेटेड मॉडल का सबसे बड़ा लाभ इंटरमीडिएट उत्तीर्ण छात्रों को मिलेगा. 12वीं के बाद सीधे इस कोर्स में दाखिला लेने से छात्र चार साल के भीतर ही अपनी ग्रेजुएशन और बीएड की पढ़ाई पूरी कर लेंगे. इससे उनके शैक्षणिक करियर का एक कीमती साल बचेगा. वर्तमान में कई निजी कॉलेज इस प्रक्रिया को अपनाने के लिए अन्य डिग्री कॉलेजों के साथ तालमेल बिठा रहे हैं, ताकि अगले सत्र से नामांकन की प्रक्रिया शुरू की जा सके.
एनसीटीई का यह फैसला शिक्षक प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुधारने और इसे मुख्यधारा की उच्च शिक्षा से जोड़ने की एक सोची-समझी कोशिश है. बीएड कॉलेजों को बहु-विषयक संस्थानों के साथ जोड़कर सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भविष्य के शिक्षकों को केवल शिक्षण कौशल ही नहीं, बल्कि विषय का भी गहरा ज्ञान हो. कोल्हान के कॉलेजों के लिए यह बदलाव अस्तित्व बचाए रखने की चुनौती के साथ-साथ शिक्षा के स्तर को आधुनिक बनाने का एक बड़ा अवसर भी है.