NCRB Report: नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट ने झारखंड की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. साल 2025 के अंत में जारी इन आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड हत्या के मामलों में पूरे देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है. राज्य में हत्या की दर प्रति लाख आबादी पर 3.7 दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत के मुकाबले काफी चिंताजनक है. आंकड़ों की मानें तो राज्य में हर साल औसतन 1,463 हत्याएं हो रही हैं.
डायन हिंसा और ऑनर किलिंग का गढ़ बना प्रदेश
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू सामाजिक कुरीतियों से जुड़ी हिंसा है. झारखंड अब देश का वह राज्य बन गया है जहां डायन-बिसाही के संदेह में और ऑनर किलिंग के नाम पर सबसे ज्यादा खून बह रहा है. पिछले तीन वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि इस तरह की हिंसा में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है. साल 2023 में जहां 196 मामले थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 345 तक पहुंच गई है. यह आंकड़ा पड़ोसी राज्य बिहार से भी कहीं अधिक है.
बढ़ते अपराध और महिलाओं की स्थिति
राज्य में आईपीसी के तहत दर्ज होने वाले कुल अपराधों में भी इजाफा देखा गया है. जहां 2024 में 38,145 मामले दर्ज थे, वहीं 2025 में यह ग्राफ उछलकर 51,756 पर पहुंच गया. हालांकि, राहत की बात यह है कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले कुल अपराधों में मामूली गिरावट आई है, लेकिन यह तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है. राज्य में आज भी बलात्कार के 1,221 और दहेज उत्पीड़न के 1,487 मामले दर्ज होना महिला सुरक्षा के दावों की पोल खोलता है. घरेलू हिंसा के मामलों में भी झारखंड देश में दूसरे पायदान पर है.
NCRB की यह रिपोर्ट झारखंड के लिए एक “वेक-अप कॉल” है. हत्या दर में दूसरे नंबर पर होना और डायन हिंसा में अव्वल आना यह दर्शाता है कि राज्य में केवल पुलिसिंग की कमी नहीं है, बल्कि गहरे सामाजिक सुधारों की भी जरूरत है. जब तक ग्रामीण इलाकों में जागरूकता और अंधविश्वास के खिलाफ सख्त अभियान नहीं चलेगा, तब तक कानून का डर इन अपराधों को रोकने में नाकाफी साबित होगा. महिलाओं के खिलाफ अपराधों में मामूली कमी एक सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन घरेलू हिंसा के आंकड़े बताते हैं कि बंद दरवाजों के पीछे आधी आबादी अब भी असुरक्षित है.