Jharkhand News: झारखंड पुलिस अब केवल अपराधियों पर शिकंजा ही नहीं कसेगी, बल्कि अपनी उपलब्धियों का ढिंढोरा भी पीटेगी. राज्य पुलिस मुख्यालय अपनी छवि को सुधारने और जनता के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के लिए एक नई रणनीति पर काम कर रहा है. DGP कार्यालय की ओर से राज्य के सभी जिलों के एसपी को कड़ा निर्देश दिया गया है कि अब हर थाने को अपने अच्छे कामों का व्यापक प्रचार-प्रसार करना अनिवार्य होगा.
इन्फ्लुएंसर्स और सोशल मीडिया का लेंगे सहारा
पुलिस अब अपने मानवीय चेहरे को जनता के सामने लाने के लिए आधुनिक रास्तों का चुनाव करेगी. नए निर्देशों के मुताबिक, पुलिस थानों को अब अपने क्षेत्र के प्रभावशाली व्यक्तियों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के साथ मिलकर काम करना होगा. अपराधियों की धरपकड़ से लेकर खोए हुए बच्चों को उनके माता-पिता से मिलाने और पीड़ितों की मदद करने जैसी कहानियों को एक्स (X), फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर साझा किया जाएगा. मकसद साफ है कि पुलिस की केवल “डंडे वाली” छवि नहीं, बल्कि एक मददगार साथी की तस्वीर भी उभरे.
क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
यह फैसला साल 2025 में हुए डीजीपी/आईजी सम्मेलन की सिफारिशों को जमीन पर उतारने के लिए लिया गया है. गृह मंत्रालय (BPR&D) के निर्देशों के बाद झारखंड पुलिस मुख्यालय ने इसे हर जिले के लिए जरूरी कर दिया है. अब थानों को केवल केस दर्ज करने और जांच करने तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि उन्हें विभागीय वेबसाइट और सोशल मीडिया हैंडल्स को भी रोजाना अपडेट रखना होगा. इससे पुलिसिंग में पारदर्शिता आएगी और आम लोगों का पुलिस पर भरोसा बढ़ेगा.
पुलिस मुख्यालय का यह कदम “परसेप्शन मैनेजमेंट” यानी जनता की धारणा बदलने की दिशा में एक बड़ी पहल है. अक्सर पुलिस के अच्छे काम फाइलों में दबकर रह जाते हैं और केवल नकारात्मक खबरें ही सुर्खियों में आती हैं. सोशल मीडिया के इस दौर में अगर हर थाना अपनी सफलता की कहानियां साझा करेगा, तो इससे न केवल पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि अपराधियों में डर और आम शहरी में सुरक्षा का भाव पैदा होगा. हालांकि, चुनौती यह होगी कि प्रचार के चक्कर में कहीं असली पुलिसिंग और जमीनी जांच प्रभावित न हो जाए.