Jharkhand News: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन सदन के भीतर प्रवासी मजदूरों की बदहाली और उनके निबंधन का मुद्दा गरमाया रहा. डुमरी विधायक जयराम महतो ने आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार को घेरते हुए पूछा कि आखिर राज्य के लाखों मजदूर सरकारी सिस्टम से बाहर क्यों हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य के करीब 15 लाख मजदूर दूसरे प्रदेशों में काम कर रहे हैं, तो श्रम विभाग के पास सिर्फ 2.29 लाख मजदूरों का ही निबंधन क्यों है?
85% मजदूर पंजीकरण से बाहर, मदद कैसे मिलेगी?
जयराम महतो ने सदन में सरकार की तैयारियों पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि जब 80 से 85 प्रतिशत मजदूरों का रजिस्ट्रेशन ही नहीं हुआ है, तो संकट के समय उन्हें सरकारी सहायता कैसे मिल पाएगी. उन्होंने सरकार से पूछा कि शेष मजदूरों को सिस्टम से जोड़ने के लिए विभाग की क्या योजना है. इसके साथ ही उन्होंने दूसरे राज्यों में काम पर जाने वाले मजदूरों की मॉनिटरिंग और उनके नियंत्रण को लेकर भी स्पष्ट जवाब मांगा.
सरकार का जवाब, नियंत्रण कक्ष कर रहा काम
मजदूरों के सवाल पर जवाब देते हुए मंत्री संजय यादव ने कहा कि सरकार प्रवासी मजदूरों को लेकर पूरी तरह गंभीर है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि निबंधन का काम लगातार चल रहा है और सरकार हर मजदूर के परिवार के साथ खड़ी है. मंत्री ने कहा कि विदेशों तक में अगर झारखंड के मजदूरों के साथ कोई अनहोनी हुई है, तो राज्य सरकार ने उन्हें हर संभव मदद पहुंचाई है. साथ ही उन्होंने बताया कि मजदूरों की शिकायतों और निगरानी के लिए कंट्रोल रूम भी सक्रिय रूप से काम कर रहा है.
प्रवासी मजदूरों के आंकड़ों में यह भारी अंतर झारखंड की एक बड़ी प्रशासनिक खामी को उजागर करता है. जब तक मजदूरों का सही डेटा सरकार के पास नहीं होगा, तब तक किसी भी कल्याणकारी योजना का लाभ उन तक पहुंचना नामुमकिन है. जयराम महतो ने जिस 15 लाख बनाम 2 लाख के अंतर को उठाया है, वह न केवल श्रम विभाग की सुस्ती को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि हादसों के वक्त मिलने वाला मुआवजा और सहायता राशि अधिकांश मजदूरों के लिए एक कागजी सपना ही बनकर रह जाती है.