Jharkhand News: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल की बदहाली का मुद्दा छाया रहा. विधायक सरयू राय ने सदन में सरकार को घेरते हुए पूछा कि आखिर किस आधार पर बिना पानी की व्यवस्था किए अस्पताल का उद्घाटन कर दिया गया? उन्होंने आरोप लगाया कि पानी की किल्लत इस कदर है कि मरीजों के जरूरी ऑपरेशन तक टालने पड़ रहे हैं. इस गंभीर मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली.
उद्घाटन पर उठे सवाल, मंत्री ने मांगा 6 महीने का समय
सरयू राय ने कहा कि अस्पताल को शुरू करने से पहले बुनियादी सुविधाओं का ख्याल रखा जाना चाहिए था. फिलहाल अस्पताल को नगर निगम के जरिए पानी सप्लाई किया जा रहा है, जिससे आम जनता के हिस्से के पानी में भी कटौती हो रही है. इस पर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने स्वीकार किया कि विभाग को समस्याओं की जानकारी है. उन्होंने घोषणा की कि विभाग डब्लूटी प्लांट के माध्यम से पानी की स्थायी व्यवस्था कर रहा है, जिसे अगले छह महीने में पूरा कर लिया जाएगा.
महिलाओं के इलाज और सुविधाओं पर तकरार
बहस में हिस्सा लेते हुए विधायक पूर्णिमा साहू ने कहा कि नए एमजीएम में महिलाओं के इलाज में भारी दिक्कतें आ रही हैं. वहीं, मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में वैकल्पिक व्यवस्था से काम चलाया जा रहा है और किसी भी मरीज का इलाज जमीन पर नहीं होने दिया जाएगा, शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई होगी. इसी बीच जुगसलाई विधायक मंगल कालिन्दी ने सुझाव दिया कि अगर क्षेत्र के सभी छह विधायक मिलकर टाटा स्टील पर दबाव बनाएं, तो डिमना लेक से पानी की आसान व्यवस्था हो सकती है.
एमजीएम अस्पताल का मामला झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था में “जल्दबाजी” और “अधूरी योजना” का सटीक उदाहरण है. बिना जल आपूर्ति सुनिश्चित किए इतने बड़े अस्पताल का उद्घाटन करना न केवल प्रशासनिक चूक है, बल्कि मरीजों की जान से खिलवाड़ भी है. मंत्री द्वारा 6 महीने की मोहलत मांगना यह दर्शाता है कि स्थायी समाधान अभी दूर है. डिमना लेक से पानी लेने का सुझाव एक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है, बशर्ते इस पर राजनीतिक सहमति और औद्योगिक सहयोग मिले.