Jharkhand: बाबूलाल मरांडी ने झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य में विकास की योजनाओं को नए सिरे से तैयार करने की जरूरत है, खासकर आदिवासी समुदाय के हितों को ध्यान में रखते हुए।
मरांडी ने कहा कि झारखंड के अधिकांश आदिवासी परिवार खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में जिन क्षेत्रों में खनन के लिए जमीन ली जा रही है, वहां प्रभावित परिवारों के लिए वैकल्पिक जमीन या स्थायी आजीविका की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। उनका कहना था कि जमीन से जुड़े मामलों में सरकार को अधिक संवेदनशील और पारदर्शी रुख अपनाना चाहिए।
मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं पर टिप्पणी
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का नाम लेते हुए मरांडी ने कहा कि राज्य में निवेश लाने के प्रयास जरूरी हैं, लेकिन किसानों और ग्रामीण समुदाय की समस्याओं को भी समान महत्व मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को गांवों में जाकर लोगों की समस्याएं सुननी चाहिए, ताकि नीतियां जमीन से जुड़ी वास्तविकताओं के अनुरूप बन सकें।
जमीन के मुद्दे को बताया संवेदनशील
मरांडी ने कहा कि झारखंड में जमीन का सवाल ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटानागपुर क्षेत्र में जमीन के नेचर चेंज और खरीद-बिक्री को लेकर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। इस मामले में उन्होंने उच्चस्तरीय जांच की मांग की, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
सरकार की कार्यशैली पर आलोचना
विपक्ष के नेता ने राज्य सरकार को “अबुआ सरकार” की अवधारणा के विपरीत बताया और कहा कि जमीनी हकीकत को समझे बिना नीतिगत समाधान प्रभावी नहीं हो सकते। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री को भविष्य में किसी भी कानूनी जटिलता से बचने के लिए सतर्क रहने की सलाह दी।
SIR प्रक्रिया पर दी प्रतिक्रिया
चुनाव आयोग द्वारा कराए जाने वाले SIR (Special Intensive Revision) को लेकर मरांडी ने कहा कि यह चुनाव आयोग की नियमित प्रक्रिया है और देश के विभिन्न राज्यों में इसे लागू किया जाता रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि झारखंड में भी सभी राजनीतिक दलों की सहमति से यह प्रक्रिया शांतिपूर्वक पूरी होगी।