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  • 2026-02-22

Jharkhand Municipal Elections: बूथ पर तैनात रहेंगे 5 अधिकारी, जानें वोटिंग के दौरान की पूरी प्रक्रिया...

Jharkhand Municipal Elections: झारखंड नगर निकाय चुनाव को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने हर बूथ पर एक पीठासीन पदाधिकारी (Presiding Officer) और चार मतदान अधिकारियों की तैनाती की है. मतदान केंद्र के भीतर प्रवेश से लेकर वोट डालने तक की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सभी कर्मियों की जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं.

1. प्रथम मतदान अधिकारी: पहचान की जिम्मेदारी
जैसे ही आप बूथ के अंदर कदम रखेंगे, सबसे पहले आपकी मुलाकात “प्रथम मतदान अधिकारी” से होगी. यह अधिकारी मतदाता सूची की चिह्नित प्रति का प्रभारी होता है. इनका मुख्य काम आपकी पहचान की पुष्टि करना है.
• सावधानी: यदि आपकी उंगली पर पहले से स्याही लगी मिलती है या यह पाया जाता है कि आपने पुरानी स्याही मिटाने की कोशिश की है, तो यह अधिकारी आपको वोट देने से रोक सकता है.

2. द्वितीय मतदान अधिकारी: अमिट स्याही का निशान
पहचान स्पष्ट होने के बाद आप दूसरे अधिकारी के पास जाएंगे. यह अधिकारी आपके बाएं हाथ की तर्जनी (Index Finger) का निरीक्षण करेगा और नाखून के मूल पर इस तरह अमिट स्याही लगाएगा कि वह त्वचा और नाखून के बीच स्पष्ट रूप से दिखाई दे.
• नियम: आपको स्याही सूखने तक इंतजार करना होगा. यदि कोई मतदाता स्याही मिटाने की कोशिश करता है, तो उसे दोबारा स्पष्ट चिह्न लगवाए बिना मतदान की अनुमति नहीं मिलेगी.

3. तृतीय मतदान अधिकारी: वार्ड पार्षद का बैलेट पेपर
अमिट स्याही लगवाने के बाद आप तीसरे अधिकारी के पास पहुंचेंगे. यह “वार्ड पार्षद” के चुनाव के लिए बैलेट पेपर का प्रभारी होता है.
• प्रक्रिया: वह आपसे हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान लेगा और मतपत्र के काउंटरफॉयल (पर्ची) पर आपका क्रमांक अंकित करेगा.
• निर्देश: इसके बाद वह आपको बैलेट पेपर देगा और निर्देशित करेगा कि आपको गुलाबी पर्ची के साथ अगले अधिकारी के पास जाना है.

4. चतुर्थ मतदान अधिकारी: महापौर/अध्यक्ष का बैलेट पेपर
चौथा अधिकारी महापौर या अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए बैलेट पेपर का प्रभारी होता है. वह इस बात की पुष्टि करेगा कि आपकी स्याही सुरक्षित है और आपकी बारी आ गई है. यहां भी आपको हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान देना होगा, जिसके बाद आपको महापौर/अध्यक्ष पद का बैलेट पेपर प्राप्त होगा.

पीठासीन पदाधिकारी: मतदान केंद्र के कैप्टन
इन चारों अधिकारियों की कार्यशैली और पूरी मतदान प्रक्रिया की निगरानी “पीठासीन पदाधिकारी” करेंगे. वे मतदान केंद्र के समग्र प्रभारी होते हैं और किसी भी विवाद या तकनीकी समस्या की स्थिति में अंतिम निर्णय उन्हीं का होता है.
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