Railway News: दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) ने अपने कर्मचारियों के बीच बढ़ती अनुशासनहीनता और बिना सूचना मुख्यालय से गायब रहने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए बेहद सख्त आदेश जारी किया है. नए निर्देशों के मुताबिक, अब कोई भी रेलकर्मी अपने सक्षम अधिकारी की पूर्व मंजूरी के बिना न तो छुट्टी पर जा सकेगा और न ही हेडक्वार्टर छोड़ सकेगा. इस आदेश का सीधा असर चक्रधरपुर रेल मंडल सहित पूरे जोन के लगभग 94 हजार रेलकर्मियों पर पड़ेगा.
रडार पर 22 हजार रेलकर्मी, नियम तोड़ने पर भारी दंड
अकेले चक्रधरपुर रेल मंडल में तैनात लगभग 22,000 कर्मचारियों को इस नियम का कड़ाई से पालन करना होगा. रेलवे बोर्ड को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद “रेलवे सेवा (आचरण) नियमावली 1966” के तहत यह कदम उठाया गया है. यदि कोई कर्मचारी बिना अनुमति अनुपस्थित पाया जाता है, तो उसे “नो वर्क-नो पे” का सामना करना पड़ेगा. यानी न केवल वेतन कटेगा, बल्कि वह अवधि पेंशन और इंक्रीमेंट की गणना में भी नहीं जोड़ी जाएगी.
“सर्विस ब्रेक” और पास-पीटीओ पर मंडराया खतरा
लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के लिए रेलवे ने दंडात्मक कार्रवाई की लंबी फेहरिस्त तैयार की है:
• सर्विस ब्रेक: बिना अनुमति गायब रहने को सेवा में व्यवधान माना जाएगा, जिससे यात्रा पास (Pass/PTO) जैसे लाभ छिन सकते हैं.
• कठोर कार्रवाई: लंबी अनुपस्थिति पर प्रमोशन रोकना, डिमोशन, अनिवार्य सेवानिवृत्ति या सेवा से बर्खास्तगी तक की जा सकती है.
• निलंबन और भत्ता: पहले से निलंबित कर्मियों के मुख्यालय छोड़ने पर उनका निर्वाह भत्ता भी रोका जा सकता है.
आपात स्थिति में क्या करें?
रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अत्यंत जरूरी काम या आपात स्थिति आ जाए, तो कर्मचारी को अपने सुपरवाइजर को फोन, मैसेज या ईमेल के जरिए तुरंत सूचित करना होगा. बिना सूचना के मुख्यालय छोड़ने पर कोई भी बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा. प्रशासन पहले “कारण बताओ नोटिस” जारी करेगा और जवाब संतोषजनक न होने पर आधिकारिक चार्जशीट फाइल की जाएगी. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है.
रेलवे का यह आदेश परिचालन की सुरक्षा और समयबद्धता (Punctuality) को बनाए रखने के लिए एक जरूरी कड़वी दवा है. चक्रधरपुर जैसे महत्वपूर्ण रेल मंडल में कर्मचारियों की उपलब्धता रेल सुरक्षा के लिए अनिवार्य है. “सर्विस ब्रेक” जैसे कड़े प्रावधानों का उद्देश्य कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना है. हालांकि, यह सुनिश्चित करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि जेन्युइन इमरजेंसी में कर्मचारियों को छुट्टी मिलने में किसी प्रशासनिक देरी का सामना न करना पड़े.