Holi Celebration: होली अब सिर्फ भारत का त्योहार नहीं, बल्कि एक ग्लोबल सेलिब्रेशन बन चुका है. फाल्गुन की पूर्णिमा का जादू सात समंदर पार कुछ इस कदर सिर चढ़कर बोलता है कि वहां का नजारा देखकर आप भी दंग रह जाएंगे. अमेरिका की मॉडर्न होली पार्टी हो या मॉरीशस का पारंपरिक अंदाज, दुनिया के कई देशों में रंगों का जुनून भारत से कम नहीं है.
मॉरीशस: समंदर किनारे “देसी” तड़का
मॉरीशस में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी होने के कारण यहां की होली बिल्कुल घर जैसी लगती है. यहां वसंत पंचमी से ही माहौल बनने लगता है. खास बात यह है कि यहां होली की पार्टियां अक्सर खूबसूरत समंदर के किनारों पर आयोजित होती हैं, जहां लोग लोकगीतों और पारंपरिक पकवानों के बीच एक-दूसरे को रंगों में सराबोर करते हैं.
अमेरिका: रॉक म्यूजिक और गुलाल का फ्यूजन
अमेरिका के न्यूयॉर्क और कैलिफोर्निया जैसे राज्यों में होली को “फेस्टिवल ऑफ कलर्स” के रूप में मनाया जाता है. यहां का सबसे मशहूर जश्न “यूटा” (Utah) में होता है, जहां हजारों की संख्या में अमेरिकी और भारतीय समुदाय के लोग डीजे की धुनों पर एक साथ हवा में गुलाल उड़ाते हैं. यह नजारा किसी म्यूजिक फेस्टिवल जैसा होता है.
नेपाल: फागु पूर्णिमा की रौनक
पड़ोसी देश नेपाल में इसे “फागु पूर्णिमा” के नाम से जाना जाता है. काठमांडू के बसंतपुर दरबार क्षेत्र में पारंपरिक “चीर” (सजाया हुआ बांस) गाड़कर उत्सव का आगाज होता है. पहाड़ों से लेकर तराई तक, पूरा नेपाल इस दिन रंगों के शोर में डूब जाता है और परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिलता है.
सूरीनाम और गयाना: फागुआ की पुरानी यादें
कैरेबियाई देशों में होली को “फागुआ” कहा जाता है. यहां आज भी भोजपुरी संस्कृति की गहरी छाप दिखती है. लोग टोलियां बनाकर निकलते हैं और पारंपरिक “चौताल” गाते हैं. यहां का अंदाज आज भी बिल्कुल वैसा ही है जैसा दशकों पहले भारत के गांवों में हुआ करता था.
थाईलैंड: रंगों और पानी की मस्ती
थाईलैंड के बैंकॉक और फुकेत जैसे शहरों में भारतीय समुदाय के लोग स्थानीय थाई लोगों के साथ मिलकर होली खेलते हैं. यहां भारतीय होली और थाईलैंड के “सोंगक्रान” (पानी का त्योहार) का एक दिलचस्प मिश्रण देखने को मिलता है, जहां रंगों के साथ-साथ पानी की बौछारें मस्ती को दोगुना कर देती हैं.
होली का वैश्विक स्वरूप यह साबित करता है कि खुशियां और भाईचारे का कोई धर्म या सीमा नहीं होती. भारतीय प्रवासियों ने अपनी संस्कृति को विदेशों में न केवल जिंदा रखा है, बल्कि वहां के स्थानीय लोगों को भी इस रंगीन उत्सव का हिस्सा बना लिया है. आज दुनिया के अलग-अलग कोनों में उड़ता गुलाल “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना को और भी मजबूत कर रहा है.