National News: भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में कंडोलेंस बुक पर हस्ताक्षर कर ईरान के प्रति एकजुटता प्रकट की. 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई, जो 1989 से ईरान की सत्ता के केंद्र में थे, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के एक बड़े हवाई हमले में मारे गए थे. भारत की यह संवेदना ऐसे समय में आई है जब पूरा पश्चिम एशिया युद्ध के मुहाने पर खड़ा है.
खामेनेई की मौत की पुष्टि सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “ट्रुथ सोशल” पर की थी. ट्रंप ने लिखा कि यह ईरान की जनता के लिए देश पर नियंत्रण हासिल करने का सबसे बड़ा अवसर है. उन्होंने खामेनेई को इतिहास के सबसे क्रूर शासकों में से एक बताया.
श्रीलंका के तट तक पहुंचा युद्ध, 1000 से ज्यादा मौतें
खामेनेई की मौत के बाद भड़की हिंसा अब वैश्विक रूप लेती जा रही है. युद्ध की आग श्रीलंका के तट तक पहुंच गई है, जहां हिंद महासागर में एक अमेरिकी सबमरीन ने ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो से नष्ट कर दिया. उधर, अजरबैजान ने भी अपने हवाई अड्डे पर हमले का आरोप लगाते हुए ईरान को जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है.
ईरान में भारी तबाही
ईरानी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, इस संघर्ष में अब तक 1,045 से अधिक सैन्यकर्मी और नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं. तेहरान में इजरायली और अमेरिकी हमलों ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, फुटबॉल स्टेडियम और कई म्युनिसिपैलिटी बिल्डिंग जमींदोज हो गई हैं. अंतर्राष्ट्रीय समुदाय अब इस स्थिति को और बिगड़ने से रोकने की कोशिशों में जुटा है.