अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों को ऑल इंडिया सर्विसेज (मेडिकल अटेंडेंस) रूल्स, 1954 के तहत चिकित्सा सुविधा और इलाज के खर्च की प्रतिपूर्ति मिलती है। इसी नियम के आधार पर अब विधायकों, पूर्व विधायकों और उनके आश्रितों को भी समान चिकित्सा सुविधा देने की योजना बनाई जा रही है।
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि मुख्यमंत्री की इच्छा है कि जनप्रतिनिधियों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें। इसी उद्देश्य से यह पहल की जा रही है। प्रस्ताव के अनुसार पूर्व विधायकों के चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति झारखंड विधानसभा सचिवालय के माध्यम से की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से जनप्रतिनिधियों और उनके आश्रितों को बेहतर इलाज की सुविधा मिल सकेगी।
व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता
सरकार का मानना है कि जनप्रतिनिधि अक्सर जनता के बीच रहते हैं और उन पर कार्य का भारी दबाव होता है। ऐसे में उनके और उनके परिवार के लिए एक सुव्यवस्थित मेडिकल रिइंबर्समेंट सिस्टम का होना जरूरी है। अब तक विधायकों के लिए चिकित्सा प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया उतनी सुगम नहीं थी जितनी आईएएस अधिकारियों की होती है।
आम नागरिकों के लिए भी सुनिश्चित की जाएंगी
इस नए बदलाव से पारदर्शिता आएगी और इलाज के बिलों के भुगतान में होने वाली देरी को कम किया जा सकेगा। यह फैसला राज्य की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां सरकार इसे बेहतर स्वास्थ्य अधिकार के रूप में देख रही है, वहीं आम जनता की नजर इस बात पर होगी कि क्या भविष्य में ऐसी ही सुगम स्वास्थ्य सुविधाएं आम नागरिकों के लिए भी सुनिश्चित की जाएंगी।