Jamshedpur News: जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में पीजी की कुल 51 सीटों पर नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी लगभग 10 प्रतिशत सीटें खाली रह गई हैं. तीन नियमित राउंड और फिर विशेष “स्ट्रे राउंड” के आयोजन के बावजूद राष्ट्रीय कोटा में एक और राज्य कोटा में चार सीटों पर अभ्यर्थियों ने नामांकन नहीं लिया. अब इन सीटों पर इस सत्र में दाखिला संभव नहीं होगा.
एनाटॉमी और फिजियोलॉजी जैसे विभागों में कम रुचि
खाली रही सीटें मुख्य रूप से एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, फार्माकोलॉजी और पैथोलॉजी जैसे नॉन-क्लिनिकल विषयों की हैं. जानकारों का कहना है कि इन विभागों में भविष्य मुख्य रूप से शिक्षण (टीचिंग) क्षेत्र में होता है. एमबीबीएस के बाद ज्यादातर अभ्यर्थी क्लीनिकल प्रैक्टिस को प्राथमिकता देते हैं, जिसके कारण वे इन विषयों में काउंसिलिंग तो करा लेते हैं लेकिन अंतिम समय में नामांकन से पीछे हट जाते हैं.
शिक्षण करियर के बजाय प्रैक्टिस को प्राथमिकता
यह पहली बार नहीं है जब एमजीएम में ऐसी स्थिति देखी गई है. क्लीनिकल विभागों की सीटें जहां तुरंत भर जाती हैं, वहीं नॉन-क्लिनिकल विभागों में छात्रों का मोहभंग बना रहता है. चयनित अभ्यर्थी शिक्षक बनने के बजाय डॉक्टर के रूप में सीधे मरीजों का इलाज करने और प्रैक्टिस करने में अधिक रुचि दिखा रहे हैं, यही वजह है कि स्ट्रे राउंड के बाद भी सीटें खाली रह गईं.