Ranchi: रांची के प्रसिद्ध गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट Dr Jayant Ghosh को पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियों के इलाज में उनकी विशेषज्ञता के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम में चयनित किया गया है। उन्हें Interventional Endoscopy Consortium द्वारा आयोजित एक वर्ष के एडवांस्ड एंडोस्कोपी कोर्स में शामिल होने का मौका मिला है।
इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारत, फिलीपींस और थाईलैंड से कुल 24 डॉक्टरों को चुना गया है। हर देश से 8-8 विशेषज्ञ डॉक्टरों का चयन किया गया है। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि यह उपलब्धि न सिर्फ डॉक्टर के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है।
कड़ी चयन प्रक्रिया के बाद मिला मौका
इस फेलोशिप कार्यक्रम के लिए डॉक्टरों का चयन काफी सख्त प्रक्रिया के तहत किया गया। चयन के दौरान डॉक्टरों के अनुभव, उनके कार्य और एंडोस्कोपी के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता का विशेष रूप से मूल्यांकन किया गया।
भारत, फिलीपींस और थाईलैंड के कुल 24 डॉक्टरों में जगह बनाना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
नई तकनीकों की मिलेगी उन्नत ट्रेनिंग
इस एक साल के कोर्स के दौरान डॉक्टरों को एंडोस्कोपी से जुड़ी आधुनिक और उन्नत तकनीकों की ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रशिक्षण में पाचन तंत्र की जटिल बीमारियों की पहचान, उनका आधुनिक इलाज और अत्याधुनिक उपकरणों के उपयोग के बारे में विस्तार से सिखाया जाएगा।
साथ ही डॉक्टरों को जटिल मामलों को संभालने की तकनीक और मरीजों को कम दर्द व कम जोखिम के साथ बेहतर इलाज देने के तरीकों पर भी प्रशिक्षित किया जाएगा।
मरीजों को मिलेगा आधुनिक इलाज का लाभ
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम डॉक्टरों को नई तकनीक और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों से जोड़ते हैं। जब डॉक्टर इन तकनीकों को अपने अस्पतालों में लागू करते हैं तो मरीजों को अधिक सुरक्षित और प्रभावी इलाज मिल पाता है।
यही कारण है कि इस तरह के प्रशिक्षण को चिकित्सा क्षेत्र में बेहद अहम माना जाता है।
सदर अस्पताल से बनाई अलग पहचान
डॉ जयंत घोष फिलहाल Ranchi Sadar Hospital में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। सीमित संसाधनों और भारी मरीजों की संख्या के बावजूद उन्होंने अपने काम की गुणवत्ता को बनाए रखा है।
सरकारी अस्पताल में उनके इलाज की चर्चा धीरे-धीरे रांची से निकलकर पूरे झारखंड और देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचने लगी।
एंडोस्कोपी से जटिल ऑपरेशन भी संभव
हाल ही में उन्होंने Orchid Medical Centre में एक जटिल चिकित्सा प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था। सिग्मॉइड कोलन में मौजूद बड़े पॉलिप को बिना बड़े ऑपरेशन के एंडोस्कोपी तकनीक के जरिए निकाल दिया गया।
इस तरह की प्रक्रिया में मरीज को कम दर्द होता है, जोखिम भी कम रहता है और रिकवरी भी तेजी से होती है। यही आधुनिक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी उपचार की नई पहचान बन चुकी है।
हार्वर्ड से भी हासिल की है ट्रेनिंग
डॉ जयंत घोष ने अमेरिका के प्रतिष्ठित Harvard Medical School से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोगों के एडवांस मैनेजमेंट का प्रशिक्षण भी लिया है। विदेश में करियर बनाने के बजाय उन्होंने अपने राज्य झारखंड में रहकर मरीजों की सेवा करने का फैसला किया।
उनकी इस पहल का असर यह है कि अब रांची में भी कई ऐसे इलाज संभव हो गए हैं जिनके लिए पहले मरीजों को दिल्ली, मुंबई या हैदराबाद जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था।
चयन पर चिकित्सा जगत में खुशी
डॉ जयंत घोष के इस अंतरराष्ट्रीय चयन पर चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने खुशी जाहिर की है। उनके सहयोगियों और परिचितों का कहना है कि यह रांची और झारखंड के लिए गर्व की बात है।
उम्मीद जताई जा रही है कि इस प्रशिक्षण के बाद क्षेत्र में एंडोस्कोपी से जुड़े इलाज और भी उन्नत और प्रभावी तरीके से उपलब्ध हो सकेंगे।