National News: सिंधु नदी प्रणाली को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है. छह प्रमुख नदियों वाले इस सिस्टम पर दोनों देशों की बड़ी आबादी निर्भर है, लेकिन हाल के घटनाक्रम के बाद यह मुद्दा फिर से अंतरराष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया है. खासकर भारत द्वारा संधि को निलंबित किए जाने के बाद पाकिस्तान लगातार इस पर आपत्ति जता रहा है.
सिंधु जल संधि क्या है और कैसे हुआ था बंटवारा
सिंधु नदी प्रणाली में सिंधु, चिनाब, झेलम, रावी, ब्यास और सतलुज जैसी छह बड़ी नदियां शामिल हैं, जो भारत और पाकिस्तान दोनों से होकर गुजरती हैं. 1947 के विभाजन के बाद जल बंटवारे का मुद्दा सामने आया, जिसे सुलझाने के लिए 19 सितंबर 1960 को विश्व बैंक की मध्यस्थता में सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए. इस समझौते के तहत भारत को पूर्वी नदियों रावी, ब्यास और सतलुज पर अधिकार मिला, जबकि पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों सिंधु, चिनाब और झेलम का पानी इस्तेमाल करने का अधिकार दिया गया. यह संधि दशकों तक दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का आधार बनी रही.
संधि पर विवाद क्यों बढ़ा और भारत का रुख क्या है
करीब सात दशक तक चली इस संधि पर हाल के वर्षों में विवाद गहराया है. भारत ने जम्मू कश्मीर में अपने हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स को लेकर काम तेज किया, जिस पर पाकिस्तान ने आपत्ति जताई और मामला अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया. इसके बाद भारत ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद इस संधि को निलंबित करने का फैसला लिया. इसके बाद से भारत ने पाकल दुल, किरू, परनई और क्वार जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम में तेजी लाई है. भारत का स्पष्ट रुख है कि आतंकवाद के मुद्दे पर सख्ती के साथ ही वह अपने हितों को प्राथमिकता देगा.
पाकिस्तान की चिंता और बढ़ता कूटनीतिक तनाव
पाकिस्तान ने भारत के इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. वहां की सरकार का कहना है कि पानी को हथियार के रूप में इस्तेमाल करना स्वीकार्य नहीं है और इसे गंभीर खतरे के रूप में देखा जा रहा है. पाकिस्तान ने यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तक उठाया है और चेतावनी दी है कि अगर नदियों का पानी रोका गया तो देश में जल संकट गहरा सकता है. साथ ही यह भी कहा गया है कि सिंधु जल संधि एक बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसे बनाए रखना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी है.
सिंधु जल संधि को लेकर बढ़ता यह विवाद दोनों देशों के रिश्तों में नई चुनौती बनकर उभर रहा है. एक ओर भारत अपने सुरक्षा और विकास हितों पर जोर दे रहा है, तो वहीं पाकिस्तान जल संकट की आशंका जता रहा है. आने वाले समय में यह मुद्दा कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर और भी महत्वपूर्ण बन सकता है