Jharkhand News: झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के आह्वान पर अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदेश भर के मनरेगा कर्मियों ने सोमवार से तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल शुरू कर दी है. हड़ताल के पहले दिन 9 मार्च को विभिन्न प्रखंड मुख्यालयों पर कर्मियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया. इस आंदोलन में ग्राम रोजगार सेवक, अभियंता, लेखा सहायक और कंप्यूटर सहायक सहित मनरेगा से जुड़े सभी स्तर के पदाधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए.
लंबित मानदेय और आर्थिक संकट पर नाराजगी
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले छह महीनों से उन्हें मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है. वेतन न मिलने से कर्मियों के सामने गंभीर आर्थिक और मानसिक संकट खड़ा हो गया है. वक्ताओं ने आरोप लगाया कि ग्रामीण विकास की इतनी महत्वपूर्ण योजना को वर्षों से निष्ठापूर्वक चलाने के बावजूद, सरकार उनकी सामाजिक सुरक्षा और वेतन संरचना की विसंगतियों को दूर करने में विफल रही है.
नियमितीकरण और सुरक्षा की मांग
मनरेगा कर्मियों की प्रमुख मांगों में समय पर वेतन भुगतान के अलावा नियमितीकरण नीति लागू करना और समान वेतन संरचना शामिल है. कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से इन मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है. संघ ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य सरकार से टकराव करना नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से अपने न्यायसंगत अधिकार प्राप्त करना है.
आंदोलन की रूपरेखा और अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
संघ द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 10 मार्च को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया जाएगा, जबकि 11 मार्च को रांची स्थित प्रदेश मुख्यालय में राज्यस्तरीय धरना होगा. संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिरुद्ध पाण्डेय ने चेतावनी दी है कि यदि 11 मार्च तक सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो 12 मार्च से पूरे राज्य में मनरेगा कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे.