Jharkhand Vidhansabha: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 11वें दिन रेलवे की परियोजनाओं और उसमें राज्य की हिस्सेदारी को लेकर अहम चर्चा हुई. गांडेय विधायक कल्पना सोरेन मुर्मू ने सदन में रेलवे और राज्य सरकार के बीच लागत के बंटवारे में होने वाली विसंगतियों का मुद्दा उठाया.
लागत हिस्सेदारी में विसंगति का मुद्दा
कल्पना सोरेन ने सवाल किया कि रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) के निर्माण में नियमतः केंद्र और राज्य की 50-50 प्रतिशत की हिस्सेदारी होनी चाहिए. लेकिन झारखंड के संदर्भ में वास्तविकता यह है कि राज्य सरकार का बजट बढ़कर 60 प्रतिशत तक पहुँच जाता है. उन्होंने पूछा कि आखिर राज्य पर यह अतिरिक्त 10 प्रतिशत का बोझ क्यों पड़ रहा है.
यूटिलिटी शिफ्टिंग और एप्रोच रोड का अतिरिक्त भार
इस सवाल का जवाब देते हुए मंत्री सुदिव्य सोनू ने स्पष्ट किया कि आरओबी निर्माण के दौरान बिजली के खंभे, पाइपलाइन और अन्य सुविधाओं (यूटिलिटी शिफ्टिंग) को हटाने के साथ-साथ एप्रोच रोड बनाने का पूरा खर्च राज्य सरकार को ही वहन करना पड़ता है. इन कार्यों के लिए रेल मंत्रालय से कोई पैसा नहीं मिलता, जिसके कारण राज्य की कुल हिस्सेदारी 50 से बढ़कर 60 प्रतिशत हो जाती है.
रेल मंत्रालय को भेजा जाएगा पत्र
मंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया कि इस अतिरिक्त आर्थिक बोझ को कम करने के लिए राज्य सरकार जल्द ही रेल मंत्रालय को पत्र लिखेगी. सरकार का तर्क है कि जब परियोजना साझा है, तो इन अतिरिक्त खर्चों का बंटवारा भी समान रूप से होना चाहिए. साथ ही, उन्होंने सुरक्षा के लिहाज से व्यस्त फाटकों पर अंडर ब्रिज और आरओबी बनाने के लिए भी केंद्र से आग्रह करने की बात कही.
रेवेन्यू के हक पर भी हुई बात
सुदिव्य सोनू ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय रेलवे को सबसे ज्यादा रेवेन्यू देने वाले राज्यों में झारखंड शुमार है. उन्होंने माँग की कि रेल मंत्रालय से यह आग्रह किया जाएगा कि यहाँ से प्राप्त राजस्व का एक समुचित हिस्सा राज्य के बुनियादी ढांचे की बेहतरी और विकास कार्यों के लिए भी आवंटित किया जाए.