पंचाक्षर मंत्र की महिमा का किया वर्णन
कथावाचक Sudarshanacharya Maharaj ने अंतिम दिन के प्रवचन में जीवन में सकारात्मक बदलाव, शिव भक्ति और चरित्र निर्माण पर विशेष जोर दिया. उन्होंने पंचाक्षर मंत्र “ऊँ नमः शिवाय” की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि यह पाँच पवित्र अक्षरों से बना मंत्र प्रकृति के पाँच तत्वों का प्रतीक है.उन्होंने बताया कि ‘न’ पृथ्वी, ‘म’ जल, ‘शि’ अग्नि, ‘वा’ वायु और ‘य’ आकाश का प्रतिनिधित्व करता है. इन पाँचों तत्वों के संतुलन से जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है. उन्होंने कहा कि यह मंत्र अत्यंत प्राचीन, प्रभावशाली और कल्याणकारी माना गया है, जिसके जप से आरोग्य, शांति और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है.
शिव पुराण श्रवण से मिलता है आध्यात्मिक लाभ
प्रवचन के दौरान महाराज ने कहा कि शिव पुराण का श्रवण मानव जीवन को आध्यात्मिक रूप से जागृत करता है और मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करता है. उन्होंने बताया कि इस ग्रंथ में भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों, अवतारों और ज्योतिर्लिंगों की महिमा का वर्णन मिलता है. साथ ही इसमें शिव भक्ति, उपासना विधि और भक्तों की प्रेरणादायक कथाओं का भी उल्लेख है. शिव को पंचदेवों में प्रमुख स्थान प्राप्त है और उन्हें महादेव, नीलकंठ तथा शंकर जैसे अनेक नामों से पूजा जाता है. सनातन परंपरा में भगवान शिव को सृष्टि के संहारक, पालक और सृजनकर्ता के रूप में भी माना जाता है.
सुबह कथा और दोपहर में हवन पूर्णाहुति
सोमवार को कथा का आयोजन सुबह आठ बजे से हुआ, जबकि हवन पूर्णाहुति का कार्यक्रम दोपहर 12:30 बजे संपन्न हुआ. इस दौरान मुख्य यजमान पुष्पा देवी–रामाकांत साह तथा अंचल–मनीष कश्यप ने विधिवत पूजा-अर्चना कराई.
आयोजन को सफल बनाने में कई लोगों का योगदान
सात दिवसीय कथा को सफल बनाने में रामाकांत साह, मनीष कश्यप, महेश कश्यप, पवन प्रसाद, विमल अग्रवाल, गौतम सरायवाला, राहुल अग्रवाल, संकटा सिंह, राम प्रसाद शर्मा, मनीष शर्मा, रवि पटेल, अमित शर्मा, संदीप बरवालिया, अजीत प्रसाद, राजेन्द्र सोनकर, गौरव अग्रवाल और सुरेश अग्रवाल सहित मित्र कांवड़ संघ टाटानगर से जुड़े सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा. पूरे आयोजन के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर शिव महापुराण कथा का श्रवण करते रहे, जिससे मंदिर परिसर में भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा.