Jharkhand Vidhansabha: झारखंड विधानसभा में मानगो पेयजल परियोजना को लेकर आज सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई. विधायक सरयू राय ने योजना में हो रहे असाधारण विलंब पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2009 में शुरू हुई यह परियोजना 17 साल बाद भी अधूरी है. जवाब में सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सदन को आश्वस्त किया कि मार्च 2026 तक इस योजना को अनिवार्य रूप से पूरा कर लिया जाएगा.
परियोजना की उपेक्षा के आरोप
विधायक सरयू राय ने आरोप लगाया कि वर्ष 2019 से 2024 के बीच इस महत्वपूर्ण जलापूर्ति योजना की अनदेखी की गई. उन्होंने सदन को बताया कि जलमीनारें अब भी अधूरी हैं और इंटेक वेल में बालू जमा होने व पुराने मोटरों को न बदलने के कारण मानगो क्षेत्र की जनता को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. विधायक ने यह भी तर्क दिया कि योजना अपनी पूर्ण क्षमता से काम नहीं कर पा रही है.
सरकार ने बताई देरी की वजह
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने परियोजना में देरी का मुख्य कारण केंद्र सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) मिलने में हुई बाधा को बताया. उन्होंने स्पष्ट किया कि एमजीएम अस्पताल की जरूरतों को देखते हुए वहां प्रतिदिन 72 हजार लीटर पानी टैंकरों के माध्यम से भेजा जा रहा है. सरकार अब परियोजना के दूसरे चरण के निर्माण को प्राथमिकता दे रही है ताकि जलापूर्ति सुचारू हो सके.
नगर पंचायत अधिसूचना पर रुख
पेयजल के अलावा विधायक राय ने कोडरमा के डोमचांच को नगर पंचायत घोषित करने की अधिसूचना रद्द करने की मांग भी सदन के पटल पर रखी. इस पर सरकार का पक्ष रखते हुए मंत्री ने कहा कि नई जनगणना की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही इस विषय पर दोबारा विचार करना संभव होगा. तब तक वर्तमान व्यवस्था ही प्रभावी रहेगी.