Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2026-03-17

Jharkhand Vidhansabha: “राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026” पारित, छात्र हितों और पारदर्शिता पर जोर

Jharkhand Vidhansabha: झारखंड विधानसभा ने व्यापक चर्चा और कई महत्वपूर्ण संशोधनों के बाद “झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026” को अपनी मंजूरी दे दी है. इस विधायी प्रक्रिया की खास बात यह रही कि दर्शक दीर्घा में डीएवी विवेकानंद पब्लिक स्कूल (बेड़ो) के छात्र-छात्राएं खुद मौजूद थे और राज्य की उच्च शिक्षा नीति को बनते देख रहे थे. मंत्री सुदिव्य कुमार ने विधेयक को स्वीकृत करने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने बहुमत से पारित कर दिया.

नामांकन और शिकायत निवारण पर विस्तृत चर्चा
सदन में चर्चा के दौरान विधायक जयराम महतो ने शोधार्थी के रूप में छात्र हितों से जुड़े कई मुद्दे उठाए. उन्होंने नामांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता, वेबसाइट पर पात्रता शर्तों के प्रकाशन और नामांकन रद्द होने पर लिखित कारण देने की मांग की. जवाब में मंत्री सुदिव्य कुमार ने स्पष्ट किया कि सरकार नियमों के माध्यम से लिखित सूचना और अपील का अधिकार सुनिश्चित करेगी. इसके अतिरिक्त, खंड 100 के तहत छात्र शिकायत निवारण समिति का प्रावधान किया गया है, जो यूजीसी विनियम 2023 के अनुरूप 30 दिनों के भीतर समस्याओं का समाधान करेगी.

परीक्षा परिणाम और पुनर्मूल्यांकन की समय-सीमा
परीक्षाओं को लेकर सदन में प्रस्ताव रखा गया कि परिणाम घोषित करने की अवधि 45 दिन से घटाकर 30 दिन की जाए. मंत्री सुदिव्य कुमार ने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में 30 दिन का लक्ष्य रहेगा, लेकिन प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से अधिकतम 45 दिन की सीमा ही व्यवहारिक है. साथ ही, उन्होंने छात्रों को उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन और पुनर्गणना का अधिकार परिनियमों के तहत देने का आश्वासन दिया. खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी पारदर्शी चयन प्रक्रिया लागू की जाएगी.

विश्वविद्यालय सेवा आयोग के अध्यक्ष पद पर घमासान
विधेयक के खंड 143 को लेकर सदन में तीखी बहस हुई. विधायक राज सिन्हा और अमित कुमार यादव ने मांग की कि “विश्वविद्यालय सेवा आयोग” का अध्यक्ष किसी प्रशासनिक अधिकारी के बजाय अनुभवी शिक्षाविद को होना चाहिए. विपक्ष ने तर्क दिया कि शैक्षणिक अनुभव के बिना विश्वविद्यालय की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है. हालांकि, मंत्री सुदिव्य कुमार ने उत्तर प्रदेश के मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि आयोग एक नियामक संस्था है, जिसके लिए प्रशासनिक अनुभव आवश्यक है. उन्होंने बताया कि जेपीएससी का बोझ कम करने के लिए इस समर्पित संस्था का गठन किया जा रहा है.

छात्राओं का स्वागत और कार्यवाही स्थगित
विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही देख रहे छात्र-छात्राओं का स्वागत करते हुए कहा कि यह उनके लिए कानून निर्माण की प्रक्रिया समझने का बेहतरीन अवसर है. विधेयक के सभी खंडों, अनुसूची और प्रस्तावना को मंजूरी मिलने के बाद सदन की कार्यवाही 18 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई.
WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !