Jharkhand: झारखंड विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता हेमंत सोरेन ने की। यह बैठक झारखंड इको टूरिज्म अथॉरिटी की शासी निकाय की चौथी बैठक थी, जिसमें राज्य में पर्यटन को नए स्तर पर ले जाने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
प्राकृतिक संपदा को आर्थिक ताकत बनाने पर जोर
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर राज्य है, जहां पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राज्य के ऐसे सभी स्थानों की पहचान की जाए, जहां इको टूरिज्म को विकसित किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने इसे रोजगार सृजन और आर्थिक मजबूती का प्रभावी जरिया बनाने पर बल दिया।
विभागों के बीच समन्वय से बनेगी योजना
मुख्यमंत्री ने वन, पर्यटन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को आपसी तालमेल के साथ कार्य करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि तीनों विभाग मिलकर एक विस्तृत और समग्र कार्य योजना तैयार करें, जिससे इको टूरिज्म परियोजनाओं को व्यवस्थित ढंग से लागू किया जा सके।
बुनियादी सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान
बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि जिन स्थानों को पर्यटन के लिए चुना जाएगा, वहां बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों के दौरान पर्यावरण संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है और सभी योजनाएं तय समय सीमा के भीतर पूरी की जानी चाहिए।
प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हुई विस्तृत चर्चा
इस दौरान राज्य के कई प्रमुख स्थलों जैसे मैथन, नेतरहाट, पतरातू, चाईबासा, दुमका और रांची को लेकर योजनाओं पर मंथन किया गया। विशेष रूप से पतरातू में मसानजोर मॉडल की तर्ज पर इको टूरिज्म विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।
पर्यटन से रोजगार और विकास को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि इको टूरिज्म के माध्यम से न केवल झारखंड की पहचान देश-विदेश में मजबूत होगी, बल्कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। उन्होंने धार्मिक स्थलों, जंगलों, नदियों और पहाड़ी क्षेत्रों को पर्यटन से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाने को कहा।
कई वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि रहे मौजूद
इस बैठक में मंत्री सुदिव्य कुमार, मुख्य सचिव अविनाश कुमार समेत वन, पर्यावरण और जल संसाधन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी तथा इको टूरिज्म से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
जल्द दिखेगा जमीन पर असर
बैठक के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि राज्य में इको टूरिज्म के विकास को लेकर जल्द ही ठोस पहल देखने को मिलेगी, जिससे झारखंड के पर्यटन क्षेत्र को नई पहचान और गति मिल सकती है।