Jharkhand News: झारखंड के ग्रामीण कार्य और ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर के बदले कमीशनखोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के चर्चित मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है. मंगलवार को रांची स्थित पीएमएलए (PMLA) की विशेष अदालत में ED ने पांचवीं सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की, जिसमें विभाग के 14 बड़े इंजीनियरों और अधिकारियों को नए आरोपी के रूप में नामजद किया गया है. इस नई चार्जशीट के साथ ही इस बहुचर्चित घोटाले में आरोपियों की कुल संख्या अब 36 तक पहुंच गई है, जिससे विभाग के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार की गहराई का पता चलता है.
3 प्रतिशत "फिक्स कमीशन" और 3048 करोड़ का आवंटन
ED की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि विभाग में कमीशनखोरी का एक बेहद व्यवस्थित और संगठित रैकेट चल रहा था. जांच के अनुसार, 3,048 करोड़ रुपये के कुल टेंडर आवंटन के बदले ठेकेदारों से 3 प्रतिशत का एक तय कमीशन वसूला जाता था. यह राशि निचले स्तर के इंजीनियरों से लेकर सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाई जाती थी. अब तक की तफ्तीश में ED ने लगभग 90 करोड़ रुपये से अधिक की "प्रोसिड ऑफ क्राइम" (अपराध की कमाई) स्थापित कर ली है, जो इस घोटाले की व्यापकता को दर्शाती है.
करोड़ों का कैश और लग्जरी गाड़ियों का जखीरा जब्त
इस घोटाले की जांच के दौरान ED ने अब तक झारखंड, दिल्ली और बिहार के 52 ठिकानों पर छापेमारी की है. पूर्व मंत्री के पीएस संजीव लाल के करीबियों के ठिकानों से 32.20 करोड़ रुपये समेत कुल 38 करोड़ रुपये नकद बरामद किए जा चुके हैं. इसके अलावा, भ्रष्टाचार की कमाई से खरीदी गई 8 लग्जरी गाड़ियां भी जब्त की गई हैं. सक्षम प्राधिकार ने लगभग 44 करोड़ रुपये की संपत्ति को प्रोविजनल तौर पर अटैच करने की पुष्टि भी कर दी है. इस मामले में पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके पीएस संजीव लाल और जहांगीर आलम समेत 9 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं.
इन 14 रसूखदार इंजीनियरों पर कसा शिकंजा
ED ने अपनी नई चार्जशीट में जिन 14 अधिकारियों को आरोपी बनाया है, उनमें विभाग के कई वर्तमान और सेवानिवृत्त रसूखदार नाम शामिल हैं. इनमें पूर्व मुख्य अभियंता सिंगराय टूटी, राजीव लोचन, सुरेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार और कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार, अजय कुमार, अजय तिर्की, राजकुमार टोप्पो, अशोक कुमार गुप्ता, सिद्धांत कुमार शामिल हैं. इनके अलावा सेवानिवृत्त अधिकारियों में अनिल कुमार, सहायक अभियंता राम पुकार राम, रमेश ओझा और पूर्व ईआईसी उमेश कुमार पर भी कानूनी शिकंजा कसा गया है. गौरतलब है कि इस पूरे मामले की नींव 2019 में जमशेदपुर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज प्राथमिकी से पड़ी थी, जिसके बाद वीरेंद्र राम की गिरफ्तारी ने इस बड़े सिंडिकेट का कच्चा चिट्ठा खोल दिया.