Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कड़ा रुख अपनाया है. बोकारो से लापता एक युवती की मां द्वारा दाखिल "हैवियस कार्पस" (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर गुरुवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए. सुनवाई के दौरान अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए पूछा कि आखिर अब तक युवती की बरामदगी क्यों नहीं हो सकी है और "क्यों न इस मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी जाए?"
जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ में सुनवाई
इस संवेदनशील मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ में हुई. मामले की गंभीरता को देखते हुए बोकारो एसपी ऑनलाइन माध्यम से कोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए. उन्होंने अदालत को जांच की अद्यतन स्थिति (Status Report) से अवगत कराया और बताया कि पुलिस मामले को सुलझाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है. हालांकि, कोर्ट पुलिस के अब तक के प्रयासों से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आया.
जुलाई 2025 से लापता है युवती, मां ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा
यह मामला जुलाई 2025 का है, जब बोकारो की एक युवती संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी. इस संबंध में बोकारो के पिंडरोजारी थाना में नामजद प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी. महीनों बीत जाने के बाद भी जब पुलिस के हाथ खाली रहे, तो पीड़िता की मां रेखा देवी ने न्याय की उम्मीद में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. याचिकाकर्ता का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने मामले की गंभीरता को नहीं समझा और जांच में शिथिलता बरती गई.
सीबीआई जांच की लटकती तलवार
अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि पुलिस जल्द ही कोई ठोस परिणाम देने में विफल रहती है, तो जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय एजेंसी को दी जा सकती है. कोर्ट ने बोकारो एसपी को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक युवती की बरामदगी की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएं. इस मामले ने एक बार फिर झारखंड में गुमशुदा व्यक्तियों के मामलों में पुलिस की तत्परता और कार्यशैली पर सार्वजनिक बहस छेड़ दी है.